मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में आज कहानी उस कातिल की, जिसने प्रदेश के कई शहरों में ज्वेलर्स और कारोबारियों में दहशत फैला दी थी। सतना, पन्ना, इंदौर, ग्वालियर और भोपाल में हुई वारदातों का तरीका एक जैसा था। अचानक हमला, गोली या चाकू से वार, कुछ ही सेकंड में हत्या और फिर मौके से फरार। पुलिस के पास न तो कोई चश्मदीद था, न ही कोई पुख्ता सबूत। शुरुआत में ये मामले अलग-अलग जिलों की फाइलों में दर्ज होते रहे, लेकिन बाद में इन वारदातों की कड़ियां जुड़ने लगीं। सबसे बड़ा सवाल था कि पूरे प्रदेश में क्या एक शातिर कातिल वारदातों को अंजाम दे रहा था। पूरी कहानी सिलसिलेवार पढ़िए… इंदौर से खूनी खेल की शुरुआत 4 फरवरी 2010 को शाम करीब 6 बजे डॉ. प्राची चौधरी रोज की तरह अपनी बहन डॉ. वर्षा चौधरी के क्लिनिक पहुंचीं, लेकिन उस दिन क्लिनिक का गेट बाहर से बंद था। गेट बंद देखकर प्राची हैरान हुईं। आमतौर पर इस समय क्लिनिक खुला रहता था। उन्होंने गेट खोला और अंदर गईं। वहां का नजारा देखकर वह घबरा गईं। क्लिनिक के अंदर डॉ. वर्षा चौधरी खून से लथपथ पड़ी थीं। पास ही कंपाउंडर राम मौर्य भी गंभीर हालत में पड़ा था। प्राची घबरा गईं और मदद के लिए आवाज लगाई। दोनों की मौत हो चुकी थी और शरीर पर चाकू के वार के निशान थे। कुछ ही देर में आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। न CCTV फुटेज, न चश्मदीद… पुलिस के सामने सवाल घटनास्थल के आसपास न CCTV कैमरा था, न कोई ऐसा चश्मदीद मिला, जिसने किसी संदिग्ध को आते-जाते देखा हो। घर से कुछ कीमती सामान भी गायब था। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही था कि कातिल आया कैसे और फरार कहां से हुआ? पड़ोसियों ने भी कोई चीख-पुकार नहीं सुनी थी। परिजनों से पूछताछ में किसी पर सीधा संदेह सामने नहीं आया। पुलिस डॉ. वर्षा और कंपाउंडर राम मौर्य की हत्या की कई एंगल से जांच कर रही थी। पुरानी रंजिश, निजी संबंध या किसी करीबी की भूमिका-हर संभावना पर पड़ताल की जा रही थी। पुलिस के सामने सवाल कई थे, लेकिन जवाब नहीं। तभी अगले दिन इंदौर में एक और सनसनीखेज वारदात हो गई। सर्राफा कारोबारी की हत्या को हादसा दिखाने की कोशिश 5 फरवरी 2010 को इंदौर में जम्मू-कश्मीर ज्वेलर्स के सामने गार्ड श्यामसुंदर ड्यूटी पर बैठे थे। तभी उन्हें इमारत से किसी के गिरने की तेज आवाज सुनाई दी। वे मौके पर पहुंचे तो एक व्यक्ति खून से लथपथ पड़ा था। उसकी मौत हो चुकी थी। बाद में उसकी पहचान ज्वेलरी कारोबारी कुलदीप जैन के रूप में हुई। शुरुआत में पुलिस को मामला बिल्डिंग से गिरकर मौत का लगा। लेकिन जांच में सामने आया कि कुलदीप जैन को पहले गोली मारी गई थी और फिर उनकी लाश छत से नीचे फेंकी गई। सतना से भोपाल तक बढ़ता गया वारदातों का दायरा इंदौर पुलिस डबल मर्डर और ज्वेलरी कारोबारी की हत्या की जांच में जुटी थी। इसी बीच प्रदेश के दूसरे शहरों से भी एक के बाद एक ऐसी ही वारदातों की खबरें आने लगीं। कहीं सुनसान सड़क पर कारोबारी को गोली मारकर बैग लूट लिया गया, तो कहीं अकेले जा रहे व्यक्ति को निशाना बनाया गया। कहीं ज्वेलर्स को दिनदहाड़े गोली मार दी गई। हर वारदात का तरीका लगभग एक जैसा था- अचानक हमला, कुछ ही सेकंड में हत्या, लूट और फिर कातिल फरार। समय के साथ पुलिस की फाइलों में नए केस जुड़ते गए। सतना, पन्ना, ग्वालियर, भोपाल और इंदौर में हुई वारदातों ने पुलिस को उलझा दिया। ग्वालियर में 12 दिन में दो वारदातें 24 जून 2011 को ग्वालियर की गीता कॉलोनी में कारोबारी नीरज गुप्ता अपनी कार के पास मोबाइल पर बात कर रहे थे। तभी बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे। नीरज कुछ समझ पाते, उससे पहले पीछे बैठे बदमाश ने उन पर हमला किया और दूसरे ने बेहद करीब से गोलियां चला दीं। नीरज सड़क पर गिर पड़े। हमलावर उनका बैग लेकर कुछ ही सेकंड में फरार हो गए। एक बार फिर वही पैटर्न सामने आया- अचानक हमला, गोली, लूट और फरारी। पुलिस ने पुराने अपराधियों की कुंडलियां खंगालीं, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। ठीक 12 दिन बाद, 6 जुलाई को ग्वालियर में फिर वारदात हुई। हाईकोर्ट जज की सुरक्षा ड्यूटी से लौट रहे हेड कांस्टेबल शिवकांत तिवारी को एक बदमाश ने गोली मार दी और उनकी पिस्टल लूटकर फरार हो गया। सतना में भीड़ ने पकड़ा हमलावर 25 जुलाई 2011 को सतना में सर्राफा कारोबारी रामदत्त सोनी अपनी दुकान पर थे। तभी एक युवक वहां पहुंचा और कुछ देर बाद फायरिंग कर दी। गोली रामदत्त सोनी की पत्नी को लगी। आवाज सुनकर रामदत्त और आसपास के लोग दौड़े। बदमाश भाग पाता, उससे पहले भीड़ ने उसे पकड़ लिया। उसकी पिटाई करने के बाद पैर बांधकर पुलिस के हवाले कर दिया गया। शुरुआत में पुलिस को लगा कि उन्होंने एक लुटेरे को पकड़ा है, लेकिन पूछताछ में मामला साधारण लूट से कहीं बड़ा निकला। आरोपी बोला- “साहब, मारना नहीं… सब बता दूंगा” पुलिस पूछताछ में बदमाश बोला- “साहब, मारना नहीं… जो पूछोगे सब बता दूंगा। मैं बहुत बड़ा आदमी बनने वाला हूं और चुनाव लड़ने वाला हूं।” उसके बयानों से पुलिस को मध्य प्रदेश के कई शहरों में हुई वारदातों की जानकारी मिलने लगी। अब भी कई सवाल बाकी थे पुलिस को आरोपी मिल गया था, लेकिन जांच अभी बाकी थी। कई सवाल अब भी अनसुलझे थे- इन सवालों के जवाब कल क्राइम फाइल के पार्ट-2 में पढ़िए… ये भी पढ़ें… पति को मारकर 4 महीने तक राज छिपाए रखा, क्राइम फाइल्स पार्ट-1 मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी एक ऐसे हत्याकांड की, जिसके पीछे की साजिश ने सभी को हैरान कर दिया था। इसकी भनक महीनों तक किसी को नहीं लगी। परिवार को लगता रहा कि उनका बेटा अपनी पत्नी के साथ रह रहा है, इसलिए किसी को उस पर जरा भी शक नहीं हुआ। पढ़ें पूरी खबर… इलाज के बहाने ले जाकर पति की हत्या कराई, क्राइम फाइल्स पार्ट-2 मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि अशोकनगर के रहने वाले सौरभ जैन की मौत का राज तब खुला, जब उनके बेटे की स्कूल टीचर को पता चला कि सौरभ की पत्नी ऋचा स्कूल में अपने पति को मृत बता रही है। हैरानी की बात यह थी कि सौरभ के परिवार को उसकी मौत की कोई जानकारी ही नहीं थी। पढ़ें पूरी खबर…
