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जो जिम्मेदारी मिली, उसे परिणाम देकर साबित किया:नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल बोले- सप्लीमेंट्री की कभी गुंजाइश नहीं रही

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने राज्यसभा की तीनों सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। जीत का प्रमाणपत्र मिलने के 27 घंटे बाद शुक्रवार को भोपाल में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में जश्न मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को जीत की बधाई दी।। इसके बाद नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। सवाल: राज्यसभा में आपका क्या विजन होगा? जवाब: देश का विजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुत स्पष्ट तौर पर 2047 में विकसित भारत की संकल्पना के रूप में रखा है। वो हम सबका विजन है। विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश बनाने के लिए डॉ. मोहन यादव की सरकार और उनका विजन साथ में है। हम सब इसको पूरा करने के लिए जुटेंगे। सांसद के रूप में, एक कार्यकर्ता और एक नागरिक के रूप में, जहां जिस प्रकार की जिम्मेदारी बनती है। उसमें सामूहिक भागीदारी निभाते हुए करने का प्रयास करेंगे। सवाल: छात्र जीवन से अब तक के सफर के संघर्ष के बारे में बताएंगे? जवाब: ये तो काम है। नियति ने काम तय कर रखा है। जो काम तय कर रखा है, उसे मस्ती में करना है, फक्कड़पन में करना है। नियति ने छात्र जीवन से अब तक, जो तय किया है, वो करते आ रहे हैं और पूरी मस्ती में किया है। जो मिला उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ करने और परिणाम देने का प्रयास किया। बाकी ईश्वर की इच्छा है। सवाल: पिछले दो बार राज्यसभा और लोकसभा में आपका नाम चला, जब रह जाते थे तो मन में कष्ट तो होता होगा? जवाब: मुझे इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है, लेकिन इतना मुझे पता है कि मेरा नेतृत्व देवतुल्य है। वो नेतृत्व विलक्षण, अनुपम, अप्रतिम है। वो नेतृत्व आंकलन करता है और उसी अनुसार नियोजन करता है। सवाल: आप बुन्देलखंड से आते हैं। राज्यसभा में आपकी बुन्देलखंड के प्रति क्या जवाबदारी रहेगी? जवाब: राज्यसभा के सदस्य के नाते, मेरी मातृभूमि है, गांव, क्षेत्र और जिला मेरा है। उसके नाते जो जिम्मेदारी बनेगी, उसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। केवल प्रतिज्ञा मात्र नहीं, बल्कि जहां, जिस उपकरण के रूप में मेरी भागीदारी बनेगी, मैं करने का प्रयास करूंगा। मुझे लगता है कि यह परिणाम के रूप में देखा जाए तो बहुत अच्छा होगा, बजाए केवल कुछ बातों और आश्वासनों के। सवाल: बचपन से दिव्यांगता एक चुनौती रही, लेकिन कभी आपने उसे अपने काम में हावी नहीं होने दिया। आपको लगता है कि इस सफर में कहीं चुनौतियां आईं? जवाब: कुछ प्रश्न ऐसे हैं, जिनके उत्तर नहीं दिए जा सकते। लेकिन एक कार्यकर्ता के नाते मेरे संगठन और नेतृत्व ने मेरे ऊपर भरोसा किया। कठिन से कठिन काम भी मुझे दिया। उसमें कोई सप्लीमेंट्री की गुंजाइश नहीं थी। वो मैंने करके सिद्ध किया है। ये भरोसा मेरे नेतृत्व का है। आज भी राज्यसभा सदस्य के नाते, जो जिम्मेदारी संगठन ने दी है, ये भरोसा ही तो है। तो कठिन चुनौती हो या किसी भी रूप में चुनौती हो, मैं इतना कह सकता हूं कि जो कार्यकर्ता से सौ प्रतिशत की अपेक्षा है, मैं रजनीश अग्रवाल उसे सौ प्रतिशत से ऊपर करने का प्रयास करूंगा।

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