सतना में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। मेडिसिन, शिशु वार्ड और आईसीयू तक मरीजों की भीड़ है। अस्पताल की 400 मरीजों की निर्धारित क्षमता के बावजूद, वर्तमान में 550 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। बेड कम पड़ने पर मरीजों को फ्लोर बेड लगाकर इलाज दिया जा रहा है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में 1858 मरीज पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन ओपीडी में थे। वायरल फीवर, वायरल निमोनिया, ब्रोंकाइटिस निमोनिया और स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिसिन के मेल और फीमेल वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं हैं। उमस के कारण मेडिसिन ओपीडी में मरीजों और उनके परिजनों को बैठने की जगह भी नहीं मिल रही है। शिशु वार्ड की स्थिति सबसे चिंताजनक
शिशु वार्ड की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां 22 बेड की क्षमता के मुकाबले 62 बच्चे भर्ती हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, फ्लोर पर भी गद्दे बिछाने की जगह कम पड़ रही है। पीआईसीयू की स्थिति भी ऐसी ही है। 9 बेड के पीआईसीयू में 22 बच्चे भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, कई बच्चों को एक ही बेड पर इलाज देना पड़ रहा है। पीआईसीयू में कुल 84 बच्चे भर्ती
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रजापति ने बताया कि शिशु वार्ड और पीआईसीयू में कुल 84 बच्चे भर्ती हैं, जबकि दोनों की कुल क्षमता 31 बच्चों की है। वायरल संक्रमण के साथ बच्चों में भी स्क्रब टाइफस के मामले सामने आ रहे हैं। मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. बद्री विशाल सिंह ने बताया कि अस्पताल इन दिनों ओवरक्राउडेड है। वार्ड से लेकर आईसीयू तक में जगह नहीं है। वायरल फीवर, स्क्रब टाइफस और ब्रोंकाइटिस निमोनिया के मरीज बढ़े हैं। जगह की कमी के कारण मरीजों को फ्लोर बेड लगाकर भर्ती किया जा रहा है।
