ग्वालियर पुलिस महकमे और केंद्रीय जेल प्रबंधन के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब जेल के कुछ वीडियो क्लिप के नाम पर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक विदित सरवइया को ब्लैकमेल कर मोटी रकम मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया। अज्ञात ब्लैकमेलर ने न सिर्फ वॉटसएप पर वीडियो क्लिप भेजकर जेल अधीक्षक धमकी दी, बल्कि व्हाट्सएप पर हाथ का पंजा इमोजी दिखाकर (सांकेतिक रूप से ₹5 लाख या बड़ी रकम) रंगदारी की मांग की। घटना 7 जून से 13 जून के बीच है। जेल अधीक्षक ने पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी थी। जब उन्होंने ब्लैकमेलर की बात नहीं मानी तो उसने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप वायरल की हैं, जिसमें जेल में बीड़ी, सब्जी, फल सहित अन्य सामग्री को 20 से 50 गुना दाम पर बेचा जा रहा है। जेल अधीक्षक ने ग्वालियर एसएसपी व बहोड़ापुर थाना में शिकायत की है। साथ ही पुलिस ने पेनड्राइव में सुरक्षित मैसेज और वीडियो को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। इस पूरे षड्यंत्र में जेल के ही एक निलंबित प्रहरी और एक पूर्व कैदी की संलिप्तता का संदेह जताया है। ब्लैकमेलर बोला- जेल की क्लिप है, कल तक का समय है
शिकायत के अनुसार, यह पूरा मामला 7 जून 2026 की दोपहर करीब 12:40 बजे शुरू हुआ। जेल अधीक्षक के मोबाइल पर एक अज्ञात मोबाइल नंबर 9179301601 से फोन और व्हाट्सएप मैसेज आए। अज्ञात व्यक्ति ने जेल सुपरिडेंट से कहा कि उसके पास जेल के अंदर के कुछ बेहद संवेदनशील वीडियो क्लिप हैं। सबूत के तौर पर उसने 4 वीडियो क्लिप भी व्हाट्सएप पर भेजे। ब्लैकमेलर ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा, “मेरे पास ऐसी कई वीडियो क्लिप हैं। तुम्हारे पास कल तक का समय है, पैसे दे दो वरना ये सारे वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों (उच्चाधिकारियों) को भेज दूंगा। गांधी रोड पर रेस्ट हाउस में मिलने बुलाया
पीड़ित ने जब आरोपी को बातचीत के लिए जेल परिसर पर आने को कहा, तो उसने अकड़ दिखाते हुए मैसेज किया, “तेरी गरज है, तू आ।” उसने पीड़ित को गांधी रोड स्थित रेस्ट हाउस में पैसे लेकर मिलने बुलाया। जब पीड़ित ने व्हाट्सएप पर पूछा कि क्या लेकर आना है और कितने पैसे चाहिए, तो आरोपी ने व्हाट्सएप मैसेज पर हाथ के पंजे की इमोजी भेजकर भारी-भरकम राशि (संभावित ₹5 लाख) की मांग की। निलंबित प्रहरी और जेल से छूटे कैदी का ‘नेक्सस’?
जेल अधीक्षक ने आशंका व्यक्त की है कि यह मामला साधारण साइबर ठगी का नहीं, बल्कि जेल के भीतर की गुटबाजी और रंजिश से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। पीड़ित ने अपनी स्तर पर की गई गोपनीय जांच के बाद पुलिस को लिखित आवेदन में तीन मुख्य किरदारों पर सीधा संदेह जताया है। जिसमें केंद्रीय जेल ग्वालियर के निलंबित प्रहरी पवन, जेल छूटा आरोपी रिश्पाल सिंह की भूमिका की आशंका व्यक्त की है। वीडियो कहां का है? पुलिस खंगाल रही कड़ियां
आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भेजे गए वीडियो क्लिप से यह पूरी तरह साफ नहीं हो रहा है कि वह दृश्य केंद्रीय जेल ग्वालियर के हैं या किसी अन्य जेल के, और न ही उसके समय (टाइमस्टैम्प) की कोई स्पष्ट जानकारी मिल रही है। पीड़ित ने पुलिस को सारे साक्ष्य (मैसेज, कॉल लॉग और वीडियो) एक पेन ड्राइव में सौंप दिए हैं। वीडियो भेजकर बच न पाने की दी चेतावनी ग्वालियर सेंट्रल जेल अधीक्षक विदित सरवइया ने बताया कुछ वीडियो मुझे भेजे गए थे। अपरिचित नंबर से 7 जून को मैसेज भी मिला था, जिसमें ट्रांसफर सीजन होने और बच न पाने की चेतावनी दी गई थी। बाद में मीटिंग करने व कुछ लेकर आने की बात करते हुए ब्लैकमेलिंग की कोशिश की गई। वरिष्ठ अधिकारियों व पुलिस को शिकायत की गई है। बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया ग्वालियर केंद्रीय जेल के अधीक्षक द्वारा एक लिखित शिकायत ब्लैकमेलिंग की गई है। शिकायत के आधार पर जांच कर मामले की छानबीन की जा रही है। ब्लैकमेलर द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले लिया है।
