ग्वालियर नगर निगम परिषद की अभ्याचित बैठक सोमवार को अधिकारियों की अनुपस्थिति और पार्षदों के हंगामे के कारण स्थगित कर दी गई। सभापति ने नाराजगी व्यक्त करते हुए बैठक को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया। पार्षदों ने अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने साफ कहा कि यदि अधिकारियों को परिषद की बैठक में आना ही नहीं है तो फिर ऐसी बैठक आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। विरोध के बीच बैठक का माहौल गरमा गया और कई पार्षदों ने बैठक के बहिष्कार तक की चेतावनी दे दी। एक महिला पार्षद तो बैठक छोड़कर ही चली गईं। दरअसल, परिषद की इस बैठक में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। बैठक में महापौर और पार्षद तो समय पर पहुंच गए, लेकिन अधिकांश जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं थे। इसे लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि परिषद में उठाए जाने वाले मुद्दों पर अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी होती है, ताकि समस्याओं का समाधान और निर्णय सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों के बिना चर्चा केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। स्थिति को देखते हुए सभापति गिर्राज दंडोतिया ने आसंदी से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि परिषद में पार्षद अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पहुंच रहे हैं, लेकिन अधिकारी लगातार अनुपस्थित रहते हैं। ऐसी स्थिति में परिषद का संचालन करना उनके लिए भी शर्म की बात है। इसके बाद उन्होंने बैठक को 7 अगस्त तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। वहीं, पूरे मामले पर महापौर ने अधिकारियों का पक्ष रखते हुए कहा कि कई अधिकारी अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने के कारण बैठक में नहीं पहुंच सके। हालांकि, उनके स्थान पर अन्य अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के दौरान अधिकारियों को मौजूद रहना चाहिए।
