गुना में साल 2017 के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा हनी दुबे पेरोल पर आने के बाद बुधवार को फरार हो गया। हनी दुबे और उसकी मां पूनम दुबे उर्फ पक्का 15 दिन की पेरोल पर ग्वालियर सेंट्रल जेल से बाहर आए थे। दोनों को 22 जुलाई को वापस जेल पहुंचना था। हालांकि, पूनम दुबे तो जेल लौट गई, लेकिन हनी ग्वालियर पहुंचने के बाद फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। हनी दुबे और उसकी मां को वर्ष 2022 में ट्रिपल मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। दोनों पर अपने तीन दोस्तों हेमंत मीना, लोकेश लोधा और ऋतिक नामदेव की हत्या कर शव जलाने का आरोप सिद्ध हुआ था। सेकेंड हैंड बाइक खरीदने निकला था हेमंत मामला वर्ष 2017 का है। सिंचाई विभाग में पदस्थ ऑफिस अधीक्षक अंतर सिंह मीना का 17 वर्षीय बेटा हेमंत सेकेंड हैंड बाइक खरीदने के लिए 40 हजार रुपए लेकर घर से निकला था। इसके बाद वह लापता हो गया। अगले दिन उसके पिता ने पूनम दुबे और उसके नाबालिग बेटे पर शक जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 40 हजार रुपए लूटकर की हत्या जांच के दौरान हेमंत के पिता के पास फिरौती की कॉल आई। पुलिस के अनुसार, हनी दुबे ने अपनी मां पूनम और एक अन्य नाबालिग साथी के साथ मिलकर हेमंत से 40 हजार रुपए लूट लिए। इसके बाद उसकी हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए शव जला दिया। फिरौती के लिए दोस्त से कराया फोन पुलिस के अनुसार, हेमंत का मोबाइल ऋतिक को देकर उसे इंदौर भेजा गया। वहां से उसने हेमंत के पिता को 50 लाख रुपए की फिरौती के लिए फोन किया। इसका मकसद पुलिस का ध्यान गुना से हटाना था। आरोप है कि पुलिस जांच को भटकाने का यह तरीका आरोपियों ने टीवी शो ‘सावधान इंडिया’ से सीखा था। राज खुलने के डर से दो और हत्याएं पुलिस के मुताबिक, लोकेश ने फिरौती की रकम में हिस्सा मांगा और पुलिस को पूरी बात बताने की धमकी दी। इसके बाद हनी और उसके साथी उसे नेगमा के जंगल ले गए, जहां उसकी हत्या कर शव जला दिया। ऋतिक को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी, इसलिए उसकी भी हत्या कर दी गई। 2022 में हुई थी उम्रकैद वर्ष 2022 में अदालत ने पूनम दुबे और हनी दुबे को तीनों हत्याओं के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों तब से ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंद थे। पुलिस के अनुसार, हनी पहले भी कई बार पेरोल पर बाहर आ चुका है। इस बार 15 दिन की पेरोल खत्म होने के बाद वह जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। मामले में ग्वालियर जेलर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
