रबी सीजन में सिंचाई के लिए मप्र अपने बांधों से गुजरात को पानी दे सकता है। इसके बदले गुजरात हमें बिजली देगा। इस पर लगभग सहमति बन गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मंगलवार को दिल्ली में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। डॉ. यादव से पटेल ने शनिवार को भी बात की है। औपचारिक मुहर इस सप्ताह लग सकती है। हाल ही में दस दिन पहले जब मप्र में बिजली की कमी थी तो गुजरात ने सरदार सरोवर बांध से बिजली पैदा करके मप्र को बिजली दी। यह 57 मेगॉवाट से लेकर 114 मेगॉवाट प्रति दिन है जो पुराना बिजली का बकाया है, लेकिन इससे मप्र में पॉवर क्राइसेस की स्थिति नहीं बनी। इसी लिए मप्र ने भी अनुकूल रुख बनाया है। शासन के सूत्रों का कहना है कि किसी भी साल यदि मानसून औसत से कम होता है तो उसे ‘ड्राई ईयर’ माना जाता है। ऐसे में मप्र और गुजरात के बीच अनुबंध है कि पहले नंबर पर पेयजल और दूसरे नंबर पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए। बाद में उद्योगों को दिया जाए और बिजली उत्पादन किया जाए। चूंकि गुजरात ने पॉवर जनरेशन शुरू कर दिया है और लगाता मप्र को वह अनुबंध के मुताबिक कुछ बिजली दे रहा है, लिहाजा मप्र भी जल्द ही बांध से सिंचाई के लिए पानी रिलीज करेगा। मप्र में अभी सिर्फ बांध से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। यही पानी ओंकारेश्वर से आगे गुजरात के सरदार सरोवर में जा रहा है। मप्र हालांकि बातचीत में यह तर्क रख सकता है कि अलनीनो के कारण गुजरात के साथ-साथ मप्र में भी कई जिलों में कम वर्षा दर्ज की गई है। खासतौर पर 12 जिलों में तो अति कम वर्षा के हालात हैं। इनमें से काफी जिले मालवा में हैं। लिहाजा मप्र भी कंजूसी बरतते हुए पानी जारी कर सकता है। गुजरात से मिला पानी लेने का प्रस्ताव केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि गुजरात ने पानी की कमी दूर करने और आगामी रबी फसल सीजन के लिए पड़ोसी राज्यों से पानी लेने का प्रस्ताव दिया है।
