Homeमध्यप्रदेशगांव का नाम सुनते ही लौट जाते हैं रिश्ते:चार साल से नहीं...

गांव का नाम सुनते ही लौट जाते हैं रिश्ते:चार साल से नहीं निकली बारात, हर तीसरे घर में है कुंवारा बेटा

पुरखों की जमीन चली गई तो लगा कि किस्मत का लिखा है, लेकिन अब बेटों की शादियां भी रुक गईं। लोग रिश्ता लेकर आते हैं, गांव का नाम पूछते हैं और जैसे ही पता चलता है कि सलैया खुर्द डूब में आ रहा है, मना कर देते हैं। कहते हैं- बेटी को बेघर होने के लिए थोड़े ही ब्याहेंगे। यह दर्द सलैया खुर्द के विस्थापित देवसिंह राजपूत का है। उल्दन बांध परियोजना की डूब में आ रहे इस गांव में विस्थापन सिर्फ घर और जमीन खोने का नहीं है। यहां माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बेटों की शादी है। पिछले चार साल में गांव से एक भी बारात नहीं निकली। 40 घरों के इस गांव में 15 से ज्यादा युवक शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन रिश्ते नहीं हो पा रहे। वजह सिर्फ एक है—गांव का डूब क्षेत्र में होना। दरअसल, सागर जिले के बंडा विकासखंड में धसान नदी पर उल्दन बांध का निर्माण अंतिम चरण में है। इसी बारिश से बांध में पानी भरना शुरू किया जाएगा और सलैया खुर्द पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएगा। परियोजना से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और सैकड़ों गांवों को पानी मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही सलैया खुर्द के लोग अपने घर, खेत और वर्षों पुरानी बसाहट छोड़ने को मजबूर हैं। डूब का असर केवल विस्थापन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव लोगों के सामाजिक जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। दैनिक भास्कर टीम जब सलैया खुर्द पहुंची तो सामने आया कि विकास की इस डूब ने लोगों से सिर्फ उनकी जमीन और मकान ही नहीं छीने, बल्कि उनके रिश्तों, सपनों और आने वाले कल की उम्मीदों को भी डुबो दिया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले पढ़िए… बेटों की शादी नहीं होने का दर्द 30 साल के तीन बेटे, फिर भी नहीं बंधा सेहरा सलैया खुर्द के विस्थापित देव सिंह राजपूत बताते हैं कि उल्दन बांध परियोजना की घोषणा के बाद से गांव में लड़कों की शादियां लगभग थम गई हैं। पिछले चार वर्षों में एक भी युवक की शादी नहीं हुई। लोग रिश्ता लेकर आते हैं, लेकिन गांव के डूब क्षेत्र में होने की जानकारी मिलते ही मना कर देते हैं। मेरे तीन बेटे हैं, जिनकी उम्र 30 वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन अब तक शादी नहीं हो पाई। बेटों की गृहस्थी बसाने के लिए घर बनाया था और तमाम व्यवस्थाएं भी की थीं, लेकिन गांव डूब में आने से सारे सपने अधूरे रह गए। अब बेटों की शादी कराने से पहले ही गांव छोड़ने की नौबत आ गई है। बुढ़ापे में फिर से नया घर और नई गृहस्थी बसाने की चिंता सता रही है। दो बेटे कुंवारे, पहले शादी कराएं या घर बनाएं मीराबाई बताती हैं कि बच्चों के छोटे रहने के दौरान ही उनके पति का निधन हो गया था। उन्होंने मजदूरी कर बच्चों को पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और अपना घर बनाया। जब दोनों बेटों की शादी की उम्र आई, तभी गांव डूब क्षेत्र में आ गया। दोनों बेटे आज भी कुंवारे हैं। डूब के कारण सिर से छत छिन गई है। ऐसे में कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता करने को तैयार नहीं होता। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले बेटों की शादी कराएं या रहने के लिए नया घर बनाएं। दो तस्वीरें देखिए… सर्वे हुआ, डूब की खबर फैली तो थम गए रिश्ते 75 वर्षीय देवसिंह राजपूत बताते हैं कि वर्ष 2017 में उल्दन बांध परियोजना के तहत सर्वे हुआ था। तब पहली बार लोगों को पता चला कि सलैया खुर्द डूब क्षेत्र में आएगा। शुरुआत में ग्रामीणों ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उस समय गांव में शादियां होती रहीं, बेटों के सिर पर सेहरे बंधते रहे और आंगन में शहनाइयां गूंजती रहीं। बेटियों की विदाई भी होती रही। लेकिन जैसे-जैसे बांध निर्माण आगे बढ़ा और डूब की स्थिति स्पष्ट होती गई, गांव में रिश्ते आना कम होने लगे। कुछ परिवार रिश्ता लेकर पहुंचे भी, लेकिन गांव के डूब क्षेत्र में होने की जानकारी मिलते ही पीछे हट गए। उनका कहना था कि जब घर और जमीन ही पानी में समा जाएंगे तो बेटी का रिश्ता कैसे करें। देवसिंह बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में गांव के किसी भी युवक की शादी नहीं हुई है। वर्ष 2022 में गांव से आखिरी बार किसी लड़के की बारात निकली थी। इसके बाद से किसी युवक के सिर पर सेहरा नहीं बंधा। आज गांव के बुजुर्गों को घर और जमीन छिनने से ज्यादा चिंता बच्चों की शादी की है। गांव में करीब 40 घर हैं और इनमें 15 से अधिक युवक कुंवारे हैं। यानी लगभग हर तीसरे घर में एक युवक विवाह का इंतजार कर रहा है। इसी साल पानी में समा जाएगा सलैया खुर्द उल्दन बांध परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नाला क्लोजर का काम लगभग पूरा हो गया है और इसी वर्ष से बांध में जलभराव शुरू किया जाएगा। पहले चरण में बांध को उसकी क्षमता के लगभग 30 प्रतिशत यानी 457 मीटर स्तर तक भरा जाएगा। दूसरे वर्ष जलभराव 60 प्रतिशत तक पहुंचेगा, जबकि तीसरे वर्ष बांध अपनी पूर्ण क्षमता तक भर जाएगा। प्रशासनिक योजना के अनुसार, पहले चरण के जलभराव में ही सलैया खुर्द गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएगा। बांध की कुल जलभराव क्षमता 313.07 मिलियन घन मीटर है। इसकी कुल लंबाई 926 मीटर है, जिसमें 756 मीटर हिस्सा मिट्टी का और 170 मीटर कंक्रीट का बनाया गया है। छतरपुर-सागर की 80 हजार हेक्टेयर भूमि को फायदा उल्दन बांध परियोजना की अनुमानित लागत 3219.62 करोड़ रुपए है। धसान नदी पर बन रहे इस बांध से छतरपुर और सागर जिले की करीब 80 हजार हेक्टेयर (लगभग 2 लाख एकड़) कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 412 गांवों में पेयजल आपूर्ति तथा औद्योगिक इकाइयों के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के तहत सलैया खुर्द, पुरा बिनेका, बमूरा बिनेका और मुड़िया गुसाई गांव पूर्ण रूप से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं उल्दन, किरौला, कुल्ल, बहरोल, पिपरिया इल्लाई, हनौता उवारी, सेमरा अहीर, कोटिया, पिथौली और पहरगुवां सहित कई गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। पहले चरण के जलभराव में 386 मकान आएंगे डूब क्षेत्र में परियोजना के पहले चरण में 457 मीटर जलस्तर तक जलभराव किया जाएगा। इस स्तर पर बहरोल, उल्दन, पिपरिया इल्लाई, सलैया खुर्द, हनौता उवारी, किरौला, कुल्ल (तहसील बंडा) तथा मुड़िया गुसाई (तहसील मालथौन) के करीब 386 मकान और अन्य संरचनाएं डूब क्षेत्र में आ जाएंगी। इनमें 312 स्थायी और 74 अस्थायी संरचनाएं शामिल हैं। डूब प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ग्राम पनारी और पिथौली में जमीन उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन वहां आवास सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का दावा कर रहा है। बारिश में बांध में पानी भर जाएगा: आनंद बंडा वृहद सिंचाई परियोजना प्रबंधक अनिरूद्ध आनंद ने बताया कि बांध में नाला क्लोजर का काम अंतिम चरण में है। इसी बारिश से बांध में पानी भरा जाएगा। जिसको लेकर डूब में आ रहे गांवों का विस्थापन किया जा रहा है। प्रभावित मकान धारक, हितग्राही को जल्द बांध के डूब क्षेत्र को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें पुर्नवास कॉलोनी पनारी और पिथौली में प्लाट विस्थापित किया जा रहा है। परियोजना के शेष प्रभावित ग्रामवासी व मकान धारकों से अपील है कि पारित अवार्ड मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज (बैंक खाता, बंदी, आधार कार्ड, शपथ पत्र, फौत का पटवारी संजरा, मृत्यु प्रमाण पत्र, पंचनामा प्रतिवेदन, भूमि बंटाकन सहमति पत्र आदि) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बंडा कार्यालय में 7 दिन में जमा कराएं।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here