राजगढ़ जिला अस्पताल में डिलीवरी के कुछ घंटे बाद प्रसूता की मौत के मामले ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिजनों ने डिलीवरी कराने के लिए नर्स पर 2 हजार रुपए लेने और प्रसव के बाद महिला को ज्यादा ब्लीडिंग होने पर समय पर इलाज नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही मृतका के परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर और हेमराज कल्पोनी भी परिजनों के साथ धरने पर बैठ गए। प्रशासन की समझाइश पर धरना तो खत्म हो गया लेकिन अस्पताल में हंगामा चल रहा है। परिवार के लोग शव नहीं ले जा रहे हैं।
डिलीवरी के लिए 5 हजार रुपए मांगने का आरोप
परिजनों के अनुसार, शनिवार दोपहर अमरी बाई को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि नर्स ने बच्चे की स्थिति गंभीर बताते हुए डिलीवरी कराने के लिए 5 हजार रुपए की मांग की। परिजनों ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए रकम कम करने का आग्रह किया। परिवार के मुताबिक, बातचीत के बाद 2 हजार रुपए में बात तय हुई। अमरी बाई के पति दिनेश ने नर्स को 2 हजार रुपए दिए। इसके बाद शाम करीब 5:30 बजे अमरी बाई की डिलीवरी हुई और उन्होंने बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि उस समय मां और बच्ची दोनों स्वस्थ थे। रात 12 बजे शुरू हुई ज्यादा ब्लीडिंग
परिजनों के मुताबिक, रात करीब 12 बजे अमरी बाई को अचानक ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी। परिवार के लोग नर्स को बुलाने के लिए पहुंचे। अमरी बाई की सास धापू बाई का आरोप है कि नर्स अपने कमरे में सो रही थीं और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने दरवाजा खटखटाकर बहू को ज्यादा ब्लीडिंग होने की जानकारी दी। धापू बाई के अनुसार, नर्स ने कथित तौर पर कहा कि ब्लीडिंग हो रही है तो नल थोड़ी लग रहा है, हमें क्यों परेशान कर रही हो। उनका आरोप है कि काफी आग्रह के बावजूद नर्स तत्काल अमरी बाई को देखने नहीं आईं और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। कहा- समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान
परिजनों का आरोप है कि ब्लीडिंग शुरू होने के बाद यदि अमरी बाई को तत्काल उपचार मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने डिलीवरी के लिए रुपए लेने और इलाज में कथित लापरवाही के मामले में संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार के मुताबिक, अमरी बाई के पति दिनेश राजस्थान में मजदूरी करने के लिए निकले थे। उनके पास करीब 4 हजार रुपए थे। इनमें से 2 हजार रुपए नर्स को देने और 500 रुपए अपने पिता बिरम को खर्च के लिए देने के बाद वह राजस्थान के लिए रवाना हुए। दिनेश झालावाड़ पहुंच ही पाए थे कि उन्हें पत्नी की मौत की सूचना मिली। इसके बाद वह वापस राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचे। एसडीएम के आश्वासन पर खत्म हुआ धरना
घटना के बाद परिजन कार्रवाई की मांग को लेकर जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी मंजू मखेनिया अस्पताल पहुंचीं और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम निधि भारद्वाज जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने मामले की जांच के लिए जांच दल गठित करने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने डिलीवरी के लिए रुपए लेने के आरोप और इलाज में लापरवाही की शिकायत की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। आश्वासन के बाद करीब आधे घंटे में परिजनों ने धरना खत्म कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह
पुलिस की मौजूदगी में अमरी बाई का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। महिला की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए रुपए लेने और इलाज में लापरवाही के आरोपों की जांच शुरू करने की बात कही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
