पिछले साल यानि 2025 में दशहरे के दिन खंडवा के ग्राम पाडलफाटा में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया था। राजगढ़ तालाब में प्रतिमा विसर्जन के दौरान 11 लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। इनमें 8 बच्चे भी शामिल थे। हादसे के बाद कई परिवारों ने अपने परिजन खो दिए और पूरे गांव में मातम छा गया। एक साल बाद इस बार पाडलफाटा गांव में दुर्गा उत्सव नहीं मनाया गया। ग्रामीणों ने न तो दुर्गा प्रतिमा स्थापित की और न ही गरबा व अन्य आयोजन किए। हादसे की यादें आज भी ग्रामीणों के जेहन में ताजा हैं। इन लोगों ने गंवाई थी जान… हादसे के बाद थमी 15 साल की परंपरा
पाडलफाटा निवासी मुकेश बामने बताते हैं कि हादसे का दर्द गांव का हर परिवार आज भी महसूस करता है। उनके मुताबिक, हादसे से पहले गांव में नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना और गरबा होता था। दशहरे के दिन धूमधाम से प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया गया था। विसर्जन के दौरान तालाब के मुहाने पर हादसा हुआ और ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार 11 लोग पानी में डूब गए। इनमें 8 बच्चे थे। ग्रामीणों के लिए यह हादसा इतना भयावह था कि एक साल बाद भी वे उस दिन की तस्वीरें और वीडियो देखकर भावुक हो जाते हैं। गांव में करीब 15 साल से दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा चली आ रही थी। मंदिर के पास चौराहे पर पंडाल सजाया जाता था और नौ दिनों तक धार्मिक आयोजन होते थे। बच्चे और महिलाएं गरबा करते थे। हादसे में बच्चों समेत कई लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों ने इस परंपरा को फिलहाल रोक दिया है। इस बार गांव में नहीं सजा पंडाल
इस साल पाडलफाटा में दुर्गा प्रतिमा स्थापित नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों और परिजनों के साथ वे हर साल उत्सव मनाते थे, वे अब उनके बीच नहीं हैं। ऐसे में इस बार गांव ने सामूहिक रूप से दुर्गा उत्सव से दूरी बनाए रखी। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पिछले साल हुए हादसे की यादों से जुड़ा समय भी है। हादसे के बाद गांव में उत्सव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। हादसे वाले तालाब पर प्रशासन ने 6 टीमें लगाईं
पिछले साल के हादसे से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता के अनुसार, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख विसर्जन स्थलों पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं। राजगढ़ तालाब, जहां पिछले साल हादसा हुआ था, वहां बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्थानों पर पुलिस की 6 टीमें तैनात की गई हैं। प्रत्येक टीम में पुलिस विभाग से एक एएसआई और दो जवानों के साथ गांव के पटवारी, पंचायत सचिव और कोटवार को शामिल किया गया है। शहर के बड़े विसर्जन स्थलों पर रेस्क्यू टीमों की भी व्यवस्था की गई है। प्रशासन का फोकस इस बार विसर्जन के दौरान भीड़ नियंत्रण, प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों को जाने से रोकने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू पर है। पिछले साल के हादसे में 11 की गई थी जान
पाडलफाटा के राजगढ़ तालाब में पिछले साल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 8 बच्चे शामिल थे। हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की ओर से राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया था। इस घटना के बाद विसर्जन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इस बार प्रशासन ने संवेदनशील स्थलों पर पहले से बैरिकेडिंग, पुलिस बल और रेस्क्यू टीम की व्यवस्था की है। पहले ट्रॉली पलटी, उसके ऊपर ट्रैक्टर पलट गया
प्रत्यक्षदर्शी करण के अनुसार, रास्ते में विसर्जन के लिए कोई बेहतर स्थान नहीं मिला, तो लोग हमारे जामली गांव आए। यहां बैकवाटर में मूर्ति विसर्जन के लिए जाने लगे। बैक वाटर के नजदीक पहुंचे ही थे कि ट्रैक्टर संतुलन खो बैठा और पहले ट्रॉली पलटी, फिर ट्रैक्टर भी उसके ऊपर पलट गया। जो लोग ट्रॉली बैठे थे, वे पानी में उसके नीचे दब गए। उम्र में बड़े कुछ लोग बाहर निकल सके। बाकी लोग दबे रह गए। पिछले साल हुए हादसे से जुड़ी तस्वीरें…
