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केजरीवाल समेत 6 AAP नेताओं पर कंटेम्प्ट कार्रवाई का आदेश:जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं- मेरे और कोर्ट के खिलाफ कैंपेन चलाया; शराब नीति केस छोड़ा

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई शुरू करने का आदेस दिया है। उनके अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और विनय मिश्रा पर भी अवमानना की कार्रवाई होगी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि उनके और कोर्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और बदनाम करने वाली बातें पोस्ट की गईं। ऐसे में वह चुप नहीं रह सकतीं। केजरीवाल का व्यवहार क्रिमिनल कंटेम्प्ट के बराबर है और अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इससे अराजकता फैल जाएगी। उन्होंने खुद को शराब नीति घोटाला मामले की सुनवाई से अलग करते हुए कहा- ये केस कोई और बेंच सुनेगी। क्योंकि कानून के मुताबिक जो जज कंटेम्प्ट प्रोसिडिंग्स ड्रॉ करते हैं वो मेन केस को नहीं सुन सकते हैं। मैं इस मामले को CJ के सामने लिस्ट करूंगी ताकि केस की सुनवाई कोई दूसरा जज कर सके। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला केस से जस्टिस शर्मा को हटाने की मांग की थी। केजरीवाल का आरोप था कि जस्टिस शर्मा RSS के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। 27 अप्रैल: केजरीवाल बोले- हाईकोर्ट में पेश नहीं होऊंगा अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर कहा था- ‘शराब नीति घोटाला मामले में मैं हाईकोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलीलें रखेगा। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। केजरीवाल ने आरोप लगाया था- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच करीब 5904 केस मिले। अगर जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तय कर रहे हैं तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ फैसला सुना पाएंगी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने जस्टिस शर्मा की कोर्ट में पेश होना बंद कर दिया है। उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए अदालत में उपस्थित होने का फैसला किया। 20 अप्रैल: AAP नेताओं ने जज से हटने की मांग की थी दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था- मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं। दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता पर पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में कई बार गई हैं। उनके बच्चे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा था- अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में न आने की शपथ ले। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता। एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की तैयारी AAP नेताओं की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा था, इसलिए हाईकोर्ट ने सीनीयर एडवोकेट को ‘एमिकस क्यूरी’ यानी कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त करने का फैसला किया था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए सहमति भी दे दी है। इस बीच कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान उसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अदालत व जज के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी मिली, जिसके बाद अवमानना कार्रवाई का फैसला लिया गया। CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी दरअसल हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई हो रही है जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया था। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया और पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 लोगों को राहत दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… जज से बहस वाले वीडियो पर केजरीवाल को नोटिस, हाईकोर्ट ने पूछा- सबसे पहले अपलोड किसने किया दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व CM अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया। याचिका बिना इजाजत कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने को लेकर है। कोर्ट ने सभी वीडियो डिलीट करने और लिंक हटाने के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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