मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। कांग्रेस की जीत में ‘मेलोडी’ की मिठास
कांग्रेस ने आखिरकार दतिया विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। उपचुनाव में कांग्रेस जीत गई। इस जीत में ‘मेलोडी’ वाली मिठास भी घुली। हां, वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली मेलोडी। दरअसल, पिछले दिनों इटली के दौरे पर गए पीएम मोदी ने वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट में ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी। इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। अब दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार के बाद कांग्रेस नेताओं ने मिठाई नहीं, बल्कि ‘मेलोडी’ से कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराया। यानी जीत का जश्न भी मनाया और इसी बहाने भाजपा को चिढ़ाने का मौका भी नहीं छोड़ा। देखा जाए तो कांग्रेस के आंगन में लंबे अरसे बाद जीत की किलकारी गूंजी है। जश्न तो बनता है। लिहाजा दतिया से लेकर भोपाल तक पूरे प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जीत का जश्न मनाया। इधर, इस जीत से गदगद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव का शंखनाद बताया। उन्होंने दतिया की जनता को साधुवाद दिया और धन्यवाद कहा। वहीं, दतिया में जीत को लेकर फुल कॉन्फिडेंस दिखा रहे भाजपा नेताओं के सुर भी नतीजे आते ही बदल गए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दतिया सीट कांग्रेस की थी और कांग्रेस के पास ही है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा को करीब 1700 वोट ज्यादा मिले हैं। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो यहां तक कह दिया कि उपचुनाव ज्यादा महत्व के नहीं होते। फिर भी हार, हार होती है और जीत, जीत होती है। हम नतीजों पर चिंतन करेंगे। खरी बात ये है कि वाकई हार, हार होती है और जीत, जीत होती है। अब कांग्रेस लंबे अरसे बाद जश्न में डूबी है, तो भाजपा चिंतन-मनन की स्थिति में आ गई है। दतिया का ये उपचुनाव कांग्रेस को भी कुछ सिखाएगा और भाजपा को भी सबक देगा। फर्क बस इतना है कि फिलहाल कांग्रेस के हिस्से में ‘मेलोडी’ की मिठास है और भाजपा के हिस्से में नतीजों का चिंतन। नरोत्तम मिश्रा ने बताया- उन्हें क्या चाहिए
दतिया उपचुनाव में प्रचार की शुरुआत पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं से हुई थी। एक सभा को संबोधित करते हुए वे भावुक हो गए थे। पूरे चुनाव के दौरान उनके आंसू चर्चा का विषय बने रहे। अब जब नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आए तो सियासी गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा कि कहीं नरोत्तम दादा के आंसुओं का रिएक्शन तो नहीं हो गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खुलकर कहा कि नरोत्तम मिश्रा टिकट चाहते थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। उनके लोगों ने भितरघात किया और इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। इधर, नतीजों वाले दिन नरोत्तम मिश्रा दिनभर मतगणना के रुझानों पर मीडिया से बात करते रहे। लेकिन जैसे-जैसे कांग्रेस की बढ़त बढ़ती गई और भाजपा की नैया डूबती नजर आई, भोपाल स्थित उनके बंगले पर भी ताला लटका नजर आया। अब सियासी गलियारों और राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के जेहन में सवाल यही है कि भाजपा में आगे नरोत्तम मिश्रा की क्या भूमिका रहने वाली है? इस सवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने साफ कहा कि उनकी भूमिका पहले कार्यकर्ता की थी और आगे भी कार्यकर्ता की ही रहेगी। किसी पद की अभिलाषा नहीं है, लेकिन पार्टी कोई काम दे, इसकी अभिलाषा जरूर है। अब सबकी नजर इसी बात पर है कि दतिया के नतीजों के बाद भाजपा नरोत्तम मिश्रा को क्या जिम्मेदारी देती है और उनकी सियासी पारी आगे किस दिशा में जाती है। भावुक हुए आशुतोष ने कह दी बड़ी बात
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने दतिया उपचुनाव में हार के बाद कहा कि वे जनादेश का पूरा सम्मान करते हैं। इस दौरान वे थोड़े भावुक भी नजर आए। चेहरे पर मायूसी साफ दिखाई दे रही थी। जब उनसे भितरघात को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो वे भितरघातियों को सिर्फ इतना संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा को मां कहने वाले अगर मां के साथ ही ऐसा मजाक करते हैं, तो उन्हें इस बारे में भावनात्मक रूप से भी सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने मन-मस्तिष्क में इस तरह की राजनीति नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि भाजपा को ‘पार्टी विद डिफरेंस’ के रूप में जाना जाता है। भाजपा में काम करने वाला हर व्यक्ति सबकी सेवा के लिए रहता है। इधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी हार की समीक्षा की बात कही है। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। कोई भी कार्यकर्ता, चाहे वह किसी भी पद पर हो, उसे अनुशासन में रहकर ही पार्टी का काम करना चाहिए। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। और अब अंदर की बात.. भितरघातियों पर कार्रवाई की तैयारी
दतिया उपचुनाव में मिली हार ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। अब पार्टी ने इस हार का पोस्टमॉर्टम शुरू कर दिया है। हार की वजहों की हर एंगल से समीक्षा की जा रही है। सुना है कि भाजपा नेताओं ने भितरघातियों के डिजिटल सबूत जुटाकर दिल्ली तक पहुंचा दिए हैं। इतना ही नहीं, चुनाव के दौरान भी ऐसे साक्ष्य आलाकमान को सौंपे जा चुके हैं। अब खबर है कि भाजपा ने भितरघातियों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। सुना है, कार्रवाई की शुरुआत दतिया से ही होने जा रही है। यानी दतिया के नतीजे आने के बाद अब संगठन में भी ‘विकेट गिरने’ का सिलसिला शुरू हो सकता है। इनपुट सहयोग – राधावल्लभ मिश्रा और विजय राठौर (दतिया), विजय सिंह बघेल (भोपाल) ये भी पढ़ें –
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