कमर्शियल टैक्स विभाग ने सिर्फ प्रमोशन करने के लिए कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर (सीटीआई) और टैक्स असिस्टेंट (टीए) के मर्जर का प्रपोजल सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को भेज दिया है। विभाग ने जीएडी से राय मांगी है कि इस मर्जर के बाद एक ज्वाइंट सीनियॉरिटी लिस्ट तैयार हो जाएगी। इसी के बाद असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (एसीटीओ) के पद पर प्रमोशन हो सकेंगे। नियमों में संशोधन करना होगा। जीएडी की सहमति मिलने के बाद ही अब प्रमोशन का मामला आगे बढ़ेगा। विभाग ने साफ किया है कि यह कैडर का मर्जर नहीं है। सीटीआई की इस मांग को भी खारिज किया है कि एसीटीओ की पोस्ट के लिए उनकी दावेदारी टीए से अधिक है। विभाग का कहना है कि कानून सीटीआई और टीए दोनों को समानांतर फीडर कैडर मानता है। दोनों की शुरुआती भर्ती प्रक्रिया अलग जरूर रही है, लेकिन इसके आधार पर प्रमोशन में किसी एक को दूसरे पर प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। भर्ती प्रक्रिया अलग होने से टीए अधीनस्थ या अयोग्य नहीं हो जाते। 15 दिसंबर 2008 के गजट नोटिफिकेशन, जिसे 6 अप्रैल 2013 को संशोधित किया गया, में स्पष्ट है कि एसीटीओ के 50% पद सीटीआई और बाकी 50% टीए से भरे जाने हैं। शेड्यूल-चार में भी दोनों को फीडर कैडर में शामिल किया गया। विभाग के मुताबिक यह राज्य सरकार द्वारा किया गया वैधानिक संशोधन है, नियमों की गलत व्याख्या नहीं। हाई कोर्ट ने भी माना है कि दोनों कैडर कानूनी रूप से समान हैं। कोर्ट ने कैबिनेट-वित्त विभाग की मंजूरी और विभागीय आदेशों की जांच में टीए पदों पर कार्यकाल की पाबंदी या अस्थायी प्रकृति नहीं पाई। विभाग की दलीलों को सीटीआई ने किया खारिज मप्र वाणिज्यिक कर निरीक्षक संघ ने विभाग की दलीलों को खारिज कर दिया है। संघ ने कहा कि 21 जुलाई 2026 के हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच ने यह स्पष्ट किया है कि सीटीआई और टीए केवल समान वेतनमान के आधार पर बराबर नहीं माने जा सकते और यह दोनों संवर्ग अलग हैं। ऐसे में इंदौर सिंगल बेंच का फैसला स्वमेव समाप्त हो जाता है। इसी तरह 15 दिसंबर 2008 का संशोधन एवं 6 अप्रैल 2013 का संशोधन पूर्णतः प्रशासनिक अधिसूचना के द्वारा किया गया है, जबकि दो पूर्णतः भिन्न संवर्ग को सामान करने से पहले मप्र रूल्स आफ बिजनेस के नियम 11(1) (क) के अनुसार इस अधिसूचना को कैबिनेट एवं वित्त विभाग के द्वारा पारित किया जाना चाहिए था। संघ ने यह भी जोड़ा कि टीए का पद अस्थाई प्रकृति का है। यह विभाग के ही दस्तावेजों में है। एमपी पीएससी द्वारा शुद्धि पत्र जारी किया जा चुका है। 16 मार्च 1993 के जीएडी के निर्देश के बाद भी कमर्शियल टैक्स विभाग के द्वारा टीए के अस्थाई पद ही निर्मित किए गए और इस प्रकार के पदों के लिए ही वित्त विभाग के द्वारा लगातार अस्थाई पदों की निरंतरता के संबंध आदेश जारी किए जाते रहे हैं। एसीटीओ के लिए केवल सीटीआई ही सही दावेदार है। सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राजपत्रित 100% पदोन्नति का पद है। टीए स्पष्ट रूप से सिविल सेवा में बैक डोर एंट्री है। संघ ने कहा कि पदोन्नति के पद का रिजर्वेशन केवल भारतीय संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति को ही दिया जा सकता है। किसी विशेष संवर्ग को नहीं। वाणिज्यिक कर निरीक्षक राज्य सिविल सेवा परीक्षा के 38 क्लासिफाइड पोस्ट में सम्मिलित है।
