मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजे को 2 गुना से बढ़ाकर 4 गुना करने के फैसले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर जहां राज्य सरकार इसे किसानों के हित में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा सरकार पर ‘क्रेडिट चोरी’ और किसानों को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाया है। यह मनमोहन सरकार के 2013 के कानून की बहाली मात्र जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए कहा कि यह कोई नया उपहार नहीं है, बल्कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा सितंबर 2013 में बनाए गए भूमि अधिग्रहण कानून का हिस्सा है। सच्चाई यह है कि 2013 के कानून में ही ग्रामीण भूमि स्वामियों को 4 गुना मुआवजे का प्रावधान था। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने 10 साल तक इसे रोक कर रखा और अब ‘मल्टीप्लायर फैक्टर’ को लागू कर झूठी वाहवाही बटोरने की कोशिश कर रही है। देरी के लिए मांगी जाए माफी रमेश ने ट्वीट में आगे लिखा कि एक दशक के लंबे अंतराल और किसानों के पुरजोर संघर्ष के बाद सरकार झुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को इस देरी के लिए किसानों से माफी मांगनी चाहिए, न कि उन्हें अपने अहसान तले दबाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए पुरानी उपलब्धियों को अपना बताकर पेश कर रही है। सरकार ने गांवों में मुआवजा किया है चार गुना मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन का अधिग्रहण अब किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा। सड़क, पुल, रेलवे लाइन, नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई जैसी परियोजनाओं के लिए जमीन लेने पर अब बाजार दर का 2 गुना नहीं, बल्कि 4 गुना मुआवजा दिया जाएगा। कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राजस्व विभाग जल्द इसका नोटिफिकेशन जारी करेगा। सरकार की कोशिश है कि इसे इसी माह से लागू किया जाए। शहरी क्षेत्रों में पहले की तरह 2 गुना मुआवजे की व्यवस्था जारी रहेगी, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह नई नीति लागू होगी। इस फैसले के साथ मप्र उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां ग्रामीण जमीन अधिग्रहण पर अधिक मुआवजा दिया जा रहा है। मंत्रियों की समिति ने दी रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बेहतर मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए पहले ही तीन मंत्रियों की कैबिनेट कमेटी बनाई थी। इसमें पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह अध्यक्ष, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप सदस्य थे। इसी कमेटी की सिफारिशों को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ये भी समझिए
