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एमपी में अब 23 मई तक होगी गेहूं खरीदी:सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी जानकारी; अब हर खरीदी केन्द्र पर होंगे 6 तौल कांटे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गेहूं उपार्जन की समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने एक्स पर जानकारी साझा की कि किसान भाइयों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब स्लॉट बुकिंग और गेहूं खरीदी की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी गई है। इस फैसले से उन हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अब तक गेहूं नहीं बेच पाए थे। हर खरीद केन्द्र पर होंगे 6 तौल कांटे मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अब हर खरीदी केंद्र पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है, ताकि किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आवश्यकता पड़ती है, तो जिलेवार इन कांटों की संख्या में और भी वृद्धि की जा सकती है। अब रोज 2250 क्विंटल गेहूं की होगी स्लॉट बुकिंग
किसानों से अधिक से अधिक मात्रा में गेहूं की खरीदी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने केंद्रों की प्रतिदिन की क्षमता में भी बढ़ोतरी की है। अब प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों और अधिक मांग होने पर जिला प्रशासन के पास यह अधिकार होगा कि वे इस क्षमता को प्रति केंद्र 3000 क्विंटल तक बढ़ा सकें। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बोले- प्रदेश में 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं पैदा हुआ जीतू पटवारी ने गेहूं खरीदी में आ रही दिक्क्तों को लेकर कहा कि प्रदेश में इस वर्ष अनुमानित 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार ने केवल 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का ही लक्ष्य रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस धीमी गति से काम हो रहा है, उसे देखते हुए यह लक्ष्य पूरा करने में भी 140 दिन लग जाएंगे। बार-बार तारीख बढ़ाना केवल प्रशासनिक विफलता को छिपाने और किसानों को भ्रमित करने का एक तरीका है। पटवारी बोले- फर्जी किसान बनाकर करोड़ों का घोटाला किया जा रहा पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भिंड, मुरैना और राजगढ़ जैसे जिलों में फर्जी किसान बनाकर करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असली किसानों की जमीन पर उन लोगों के पंजीयन कर दिए गए जिनके पास खुद की भूमि तक नहीं है। सरकारी भाव और बाजार भाव के बीच के अंतर का फायदा उठाकर प्रशासनिक मिलीभगत से करोड़ों की हेराफेरी की जा रही है, जबकि असली किसान वेबसाइट और सर्वर की खराबी के कारण दर-दर भटक रहा है।

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