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एमपी की सड़कों पर मरने वालों में 41 फीसदी ‘Gen-Z’:पुलिसिया लापरवाही से 19% घायलों को नहीं मिल पाया फ्री इलाज

मध्य प्रदेश के हाईवे युवाओं के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) साबित हो रहे हैं, जहां रफ्तार के शौकीन ‘Gen-Z’ (14 से 29 वर्ष के युवा) सबसे ज्यादा अपनी जान गंवा रहे हैं। इसके साथ ही, प्रशासनिक मोर्चे से एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है कि सूबे में सड़क हादसों के शिकार 19 फीसदी घायलों को ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के तुरंत बाद का पहला घंटा) में मुफ्त इलाज की सुविधा नसीब ही नहीं हो सकी। केंद्र सरकार की ‘पीएम-राहत योजना’ के तहत मिलने वाले 1.5 लाख रुपये तक के फ्री इलाज के आड़े सरकारी तंत्र की सुस्ती आ गई, जिससे सैकड़ों घायलों को इस हक से महरूम होना पड़ा। गोल्डन आवर’ में 336 घायलों को नहीं मिल पाया फ्री इलाज लोकसभा में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ‘पीएम-राहत’ योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को मुफ्त कैशलेस इलाज तभी मिलता है, जब स्थानीय पुलिस 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट ई-डीएआर (e-DAR) पोर्टल पर अपलोड कर दे। लेकिन, मध्य प्रदेश में पुलिस के समय पर रिस्पॉन्स न देने के कारण 336 मामलों को योजना से सीधे रिजेक्ट (बाहर) कर दिया गया। यह कुल मामलों का करीब 19% है, जिन्हें सिस्टम की सुस्ती के कारण अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ा। मुफ्त इलाज देने में मध्य प्रदेश देश में दूसरे पायदान पर गुजरात के बाद सबसे आगे: हालांकि, पुलिस की इस लापरवाही के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार घायलों को इलाज मुहैया कराने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रही है। 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने के मामले में गुजरात (7,036 लाभार्थी) पहले स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश (6,761 लाभार्थी) पूरे देश में दूसरे स्थान पर काबिज है। हाईवे पर थमी ‘Gen-Z’ की सांसें साल 2026 के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 1,688 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से विशुद्ध रूप से 18 से 25 वर्ष के Gen-Z युवाओं की संख्या 258 है। यदि इसमें 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों और 25-29 वर्ष के युवाओं के हिस्से को शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा कुल मौतों का लगभग 41 फीसदी (करीब 700 मौतें) बैठता है, जो बेहद चिंताजनक है। अब जानिए पीएम-राहत योजना क्या है? सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार के लिए माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 13 फरवरी 2026 को देशव्यापी स्तर पर ‘पीएम-राहत योजना’ शुरू की गई है। यह योजना मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत कानूनी अधिदेश के अनुसार काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद पीड़ितों को बिना किसी वित्तीय चिंता के तुरंत उपचार उपलब्ध कराना है। योजना के तहत क्या लाभ मिलते हैं?
मुफ्त उपचार की सीमा: इस योजना के अंतर्गत किसी भी श्रेणी की सड़क (एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग या राज्य राजमार्ग) पर होने वाली दुर्घटना के प्रत्येक पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार प्रदान किया जाता है।
यह उपचार कवर दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों की अवधि के लिए वैध रहता है, ताकि ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला संवेदनशील घंटा) में मरीज की जान बचाई जा सके। यह लाभ मोटर वाहनों के उपयोग से दुर्घटनाग्रस्त होने वाले सभी नागरिकों को मिलता है। इलाज के लिए कौन से अस्पताल अधिकृत हैं?
सेल्फ लिस्टेड अस्पताल: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत आने वाले सभी पैनलबद्ध अस्पताल इस योजना के लिए स्वतः ही नामित माने जाते हैं। राज्य द्वारा नामित अतिरिक्त अस्पताल: राज्य सरकारें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के दिशानिर्देशों के अनुसार आघात-देखभाल (ट्रॉमा केयर) क्षमता वाले अन्य निजी या सरकारी अस्पतालों को भी इसमें शामिल कर सकती हैं।
गैर-नामित अस्पताल (आपातकालीन स्थिति): यदि पीड़ित को किसी ऐसे अस्पताल ले जाया जाता है जो पैनल में नहीं है, तो भी उस अस्पताल के लिए मरीज को शुरुआती आपातकालीन प्राथमिक उपचार (इमिडिएट स्टेबिलाइजेशन) देना जरूरी है, जिसके बाद मरीज को नामित अस्पताल में शिफ्ट किया जाता है।

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