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एकतरफा प्यार, चैट और CDR ने खोली साजिश की परतें:अक्षया नहीं, सोनाक्षी थी निशाना; तकनीकी सबूतों और 26 मजबूत गवाहों से बच न सके आरोपी

ग्वालियर के बहुचर्चित अक्षया यादव हत्याकांड में करीब तीन साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले तक पहुंचने में पुलिस की तकनीकी जांच, वॉट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बरामद हथियार और 26 गवाहों की गवाही निर्णायक साबित हुई। जांच में यह भी साफ हो गया कि हत्या का असली निशाना अक्षया यादव नहीं, बल्कि उसकी सहेली सोनाक्षी शर्मा थी जिससे आरोपी एकतरफा प्यार करता था। सबसे पहले जानिए क्या थी वारदात 10 जुलाई 2023 की रात करीब 8 बजे अक्षया यादव अपनी सहेली सोनाक्षी शर्मा के साथ कोचिंग से घर लौट रही थीं। दोनों जन्मदिन की खरीदारी कर स्कूटी से सिंधी कॉलोनी की ओर जा रही थीं। बेटी बचाओ चौराहे के पास बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली अक्षया के हाथ और सीने में लगी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सोनाक्षी इस हमले में बाल-बाल बच गई। घटना के बाद शहरभर में आक्रोश फैल गया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। सोनाक्षी थी असली टारगेट पुलिस जांच और अदालत में पेश साक्ष्यों से सामने आया कि मुख्य आरोपी सुमित रावत एकतरफा प्रेम के चलते सोनाक्षी शर्मा का लंबे समय से पीछा कर रहा था। वह उससे बातचीत का दबाव बनाता था, बाजार में पीछा करता था और कई बार धमकियां भी दे चुका था। वारदात वाले दिन भी निशाना सोनाक्षी ही थी, लेकिन फायरिंग के दौरान गोली अक्षया यादव को लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई। वॉट्सएप मैसेज और CDR बने सबसे बड़े सबूत घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और वॉट्सएप चैट खंगाले। जांच में सामने आया कि वारदात के तुरंत बाद आरोपी उपदेश रावत उर्फ मोंटी ने अपने साथी बाला सुरवे को संदेश भेजा था कि “गलत लड़की को गोली लग गई।” इसी चैट और आरोपियों के बीच लगातार हुई बातचीत ने पुलिस को पूरी साजिश तक पहुंचाया। मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड ने भी आरोपियों की मौजूदगी और आपसी संपर्क की पुष्टि की। पूछताछ में खुली साजिश पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सोनाक्षी की हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। मुख्य आरोपी सुमित रावत ने अपने भाई उपदेश रावत, हिस्ट्रीशीटर बाला सुरवे और अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात की योजना बनाई थी। बाला सुरवे ने अन्य आरोपियों को जोड़ने और पूरी योजना तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका निशाना सोनाक्षी थी, लेकिन गोली गलती से अक्षया को लग गई। 26 गवाहों ने मजबूत किया केस अभियोजन पक्ष ने अदालत में 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनके अलावा तकनीकी साक्ष्य, बरामद हथियार, मोबाइल रिकॉर्ड और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। चार नाबालिग आरोपियों का ट्रायल जारी इस हत्याकांड में कुल आठ आरोपी थे। इनमें चार आरोपी नाबालिग हैं। उनका मामला फिलहाल किशोर न्याय बोर्ड (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) में विचाराधीन है। सोनाक्षी की मां करुणा शर्मा ने कहा कि न्यायालय और पुलिस प्रशासन के सहयोग ने हमारी बेटी सोनाक्षी और मां करुणा की सुरक्षा और दूसरी बेटी दिवंगत अक्षया यादव को न्याय दिलवाने का जो फैसला लिया है वह उचित है। तीन सालों से न्याय की उम्मीद लगा रखी थी जो आज पूरी हुई है। तीन सालों से डर और दहशत में रहने पर मजबूर थे और ना जाने कितने दुख झेलते रहे। ये खबर भी पढ़ें… ग्वालियर के अक्षया यादव हत्याकांड में 3 साल बाद फैसला ग्वालियर के अक्षया यादव हत्याकांड में 3 साल बाद बुधवार को फैसला आया। जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें बाला सुरवे, पृथ्वीराज चौहान, उपदेश रावत और सुमित रावत शामिल है। घटना 10 जुलाई 2023 में माधौगंज थाना क्षेत्र के बेटी बचाओ चौराहे के पास हुई थी। जब अक्षरा अपनी सहेली के साथ कोचिंग से निकली थी।पूरी खबर पढ़ें

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