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इंदौर में भू-माफिया पर कसा शिकंजा, FIR भी दर्ज की:मल्हारगंज में 40 करोड़ की जमीन को निजी बताकर काटे प्लॉट, जांच में निकली सरकारी

इंदौर जिला प्रशासन ने बुधवार को भूमाफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मल्हारगंज क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी विकसित करने की कोशिश का खुलासा होने पर भूमाफिया के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। साथ ही अतिक्रमण हटाने और बेदखली की कार्रवाई भी की गई। मल्हारगंज के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार ने ग्राम सिरपुर स्थित सरकारी जमीन, सर्वे क्रमांक 33, रकबा 2.711 हेक्टेयर का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के नाम दर्ज है। जांच में पता चला कि सम्राट नगर निवासी अज्जू खां पिता भूरू खां ने इस सरकारी जमीन को अपनी बताकर 17 छोटे-छोटे भूखंड तैयार कर दिए। इतना ही नहीं, उसने सरकारी जमीन को सर्वे क्रमांक 37/1 की निजी भूमि बताकर नोटरी के माध्यम से विक्रय किया और न्यू लक्ष्मी नगर के नाम से अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास किया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि सर्वे क्रमांक 37/1 की जमीन सिद्धनाथ मिश्रीलाल पिता गणपत के नाम दर्ज है। इस भूमि का स्वामित्व अज्जू खां के नाम नहीं है। इसके बावजूद वह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उसे निजी भूमि के रूप में प्रदर्शित कर रहा था। प्रशासन के अनुसार, इस जमीन की अनुमानित बाजार कीमत करीब 40 करोड़ रुपए है। चंदन नगर थाने में एफआईआर दर्ज
27 जुलाई को अज्जू खां के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 316(5) के तहत चंदन नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। निरीक्षण के दौरान सरकारी जमीन पर जरीना बी पति अनवर, बबली पति कैलाश और यासमीन मंसूरी पति साकिर टीनशेड से बने मकानों में रहते मिले। इनके खिलाफ राजस्व प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार बेदखली के आदेश जारी किए गए हैं। पहले भी हटाया गया था अतिक्रमण
प्रशासन के अनुसार, इसी क्षेत्र में 4 मई को भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उस दौरान अली मोहम्मद, वसीम पठान, शाहरुख कुरैशी, साबरी नबी, गिरीश अखंडे, अनवर, फरहाबी, शाहिदा सहित अन्य लोगों द्वारा सरकारी जमीन पर छोटे-छोटे भूखंड बनाकर की जा रही फेंसिंग और अतिक्रमण को नगर निगम की रिमूवल टीम ने पुलिस प्रशासन के सहयोग से हटाया था। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित भूमाफिया ने 100 से अधिक प्लॉट करीब 5 लाख रुपए प्रति प्लॉट की दर से बेचे। इससे आम लोगों के साथ 5 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।

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