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इंदौर में पानी की टंकी में मिला डिकंपोज शव:बदबू आई तो लोग बोले- फिनाइल डाल दो; पुलिस ने रोका, एक्सपर्ट ने भी बताया गलत

इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र की जबरन कॉलोनी में पानी में टंकी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। रविवार से लोगों ने उन्हें नहीं देखा था। बदबू आने पर गेट खोला तो घटना का पता चला। पानी की टंकी करीब 7 फीट गहरी और 3.5 फीट चौड़ी थी। हादसे कैसे हुआ इसकी जानकारी किसी को नहीं है, क्योंकि घटना के वक्त घर में कोई नहीं था। सूचना मिलने पर पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और घटना स्थल को चेक किया। प्रांरभिक जांच में पानी में डूबने के कारण ही मौत की आशंका जताई जा रही है। रावजी बाजार पुलिस के मुताबिक मृतक ओमप्रकाश उर्फ पप्पू (45) मालवीय निवासी जबरन कॉलोनी था। वह पुताई का काम करता था। टैंक में डिकम्पोज हालत में मिला शव
परिजनों ने बताया कि पप्पू की शादी हो चुकी थी उनकी एक बच्ची भी थी। मगर उनकी पत्नी और बच्ची कई सालों पहले उन्हें छोड़कर जा चुकी थी। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह शराब भी पीता था। पानी की टंकी में करीब डेढ़ फीट पानी भी भरा हुआ था। पानी में डूबे रहने के कारण बॉडी डिकम्पोज हो गई थी। शव के चमड़ी भी निकलने लगी थी। डिकम्पोज होने से पूरे इलाके में बदबू फैल गई थी। फिनाइल डालने को कहा, पुलिस ने रोका
घटना की जानकारी मिलने पर महाकाल संस्था और सुल्तान-ए-इंदौर की टीम मौके पर पहुंची। शव को निकालने के लिए टीम के सदस्यों ने पहले तो फर्शी को तोड़ा ताकि शव को बाहर निकाला जा सके। मगर टंकी में बहुत ज्यादा बदबू आ रही थी। इस बीच शव को बाहर निकालने के लिए कुछ लोगों की मदद ली गई। जिसे शव निकालने के लिए बुलाया वह पानी की टंकी में फिनाइल डालने को कहने लगा। कुछ लोग फिनाइल की बोतल भी ले जाने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पानी की टंकी में फिनाइल नहीं डालने को कहा। पुलिस का तर्क था कि पीएम में फिनाइल की बात आ सकती है। एक्सपर्ट्स ने कहा- नहीं मिलतीं सही फाइंडिंग्स
एमजीएम कॉलेज के फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. बीके सिंह ने बताया कि इस केस में पानी की टंकी से डेड बॉडी निकालने से पहले फिनाइल या इस तरह का कोई भी केमिकल डालना अनुचित था। दरअसल, पानी की टंकी में करीब एक सप्ताह से बॉडी थी। इस दौरान वह काफी डिकम्पोज हो गई थी। अगर फिनाइल डाला जाता तो वह पानी में घुलकर डिकम्पोज बॉडी के हर हिस्से में चला जाता, जिससे सही फाइंडिंग्स नहीं मिलतीं। दो से तीन ग्लव्स पहनकर करते हैं पीएम
दूसरी बात यह है कि कई बार घटना स्थल से रवाना होने के बाद शव पीएम के लिए देर से या अगले दिन पहुंचता है। इस स्थिति में बॉडी और भी ज्यादा डिकम्पोज हो जाती है। ऐसे में फॉरेंसिक विभाग के स्टाफ और डॉक्टरों के सामने दुर्गंध एक बड़ी चुनौती होती है। डॉक्टर दो से तीन ग्लव्स पहनकर पीएम करते हैं, ताकि फाइंडिंग्स अच्छी तरह मिल सकें। घटना स्थल और पीएम रूम से बॉडी ले जाने के बाद भी दुर्गंध आती रहती है।

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