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आसिम मुनीर ईरान-अमेरिकी डेलिगेशन से अलग-अलग ड्रेस में मिले:ईरान के सामने मिलिट्री यूनिफॉर्म, US के लिए सूट, एक्सपर्ट्स बोले- यह सोचा-समझा मैसेज

ईरान-अमेरिका के प्रतिनिधि सीजफायर वार्ता के लिए शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। यहां पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दोनों का अलग-अलग अंदाज में स्वागत किया। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जबकि ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मीटिंग का नेतृत्व किया। ईरानी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त आसिम मुनीर आर्मी ड्रेस में थे। अमेरिकी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त मुनीर ने नॉर्मल सूट पहना हुआ था। इस दौरान ध्यान रखा गया कि इन हाई-लेवल मुलाकातों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय आर्मी चीफ मुनीर सामने आए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं बल्कि पावर और मैसेजिंग का प्रदर्शन था। यूनिफॉर्म के जरिए अलग-अलग संदेश रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन के मुताबिक यह कदम मैसेज देने के लिए था। उनके मुताबिक, “मुनीर अमेरिका के सामने खुद को डिप्लोमैट और ईरान के सामने सैनिक के रूप में दिखाना चाहते हैं।” डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन ने कहा कि ईरान के साथ हालिया तनाव को देखते हुए कॉम्बैट ड्रेस (मिलिट्री यूनिफॉर्म) पहनना ताकत दिखाने की कोशिश थी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच पहले मिसाइल हमले और बॉर्डर टकराव हो चुका है, इसलिए यह कदम कैमरों के लिए भी था। अमेरिका के सामने ‘राजनेता’ की छवि जेडी वेंस से मुलाकात में सूट पहनकर मुनीर ने खुद को राजनेता की तरह पेश करने की कोशिश की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे वह दिखाना चाहते हैं कि वह सिर्फ सैन्य नेता नहीं, बल्कि कूटनीतिक भूमिका भी निभा सकते हैं। इससे पहले भी वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात में सूट पहन चुके हैं। ईरान-पाकिस्तान तनाव का बैकग्राउंड 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। उसका दावा था कि वह जैश अल-अदल नाम के आतंकी संगठन को निशाना बना रहा है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में सैन्य कार्रवाई की थी। बाद में चीन के हस्तक्षेप के बाद तनाव कम हुआ, लेकिन रिश्तों में खटास बनी रही। सत्ता के केंद्र में खुद को दिखाने की कोशिश एक अहम बात यह रही कि इन मुलाकातों में आर्मी चीफ का मौजूद रहना प्रोटोकॉल के हिसाब से असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री आगे रहते हैं। रिटायर्ड मेजर जनरल संजय सोई ने कहा कि पाकिस्तान में असल सत्ता सेना के पास है और मुनीर इसे खुलकर दिखा रहे हैं। उनके मुताबिक, “वह हर अंतरराष्ट्रीय बातचीत में दिखना चाहते हैं और यह जताना चाहते हैं कि फैसले वही लेते हैं।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान और अमेरिका के साथ इन बैठकों के जरिए आसिम मुनीर ने कूटनीतिक संतुलन दिखाया और यह स्पष्ट किया कि फिलहाल पाकिस्तान में असली शक्ति उनके पास ही है। ————————— ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान पर हमले के लिए कैसे माने थे ट्रम्प:नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस आकर प्लान बताया; उपराष्ट्रपति वेंस खिलाफ थे, फिर भी जंग में कूदे तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पूरी खबर पढ़ें…

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