रानी कमलापति (आरकेएमपी) रेलवे स्टेशन पर गंदगी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्पष्ट किया है कि केवल सफाई पर खर्च दिखाना पर्याप्त नहीं है। अब सार्वजनिक संस्थानों को यह भी बताना होगा कि निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कहां और कैसे हुआ। ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्वच्छ वातावरण प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की अनदेखी संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है। इसी के साथ एनजीटी ने रेलवे, स्टेशन संचालक और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी तय करते हुए दो महीने में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। मामला दैनिक भास्कर में 6 अगस्त को प्रकाशित उस खबर के बाद सामने आया, जिसमें खुलासा हुआ था कि स्टेशन पर हर महीने करीब 7 लाख रुपए सफाई पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कचरे की थैलियां मालगाड़ियों पर रखी जा रही थीं और परिसर में कई जगह गंदगी थी। स्वत: संज्ञान के बाद गठित संयुक्त समिति की जांच में प्लेटफॉर्म-4 के पास ट्रैक पर कचरा, दो स्थानों पर ठोस अपशिष्ट का ढेर, खुला कचरा भंडारण स्थल, नियमों के विपरीत केवल दो रंग के डस्टबिन और बल्क वेस्ट जेनरेटर पंजीकरण नहीं होने जैसी खामियां मिलीं। स्टेशन संचालक ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दावा किया कि मालगाड़ी पर कचरे की थैलियां पहले से रखी थीं तथा सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि जस्टिस एसके सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने इस दलील को अंतिम नहीं माना। ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी कि तय समय में आदेशों का पालन नहीं होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। किसे क्या जिम्मेदारी दी
