पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में बाकायदा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना तैयार की है। सरकार हर साल 330 विकासखंडों में पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित करेगी। पारंपरिक खेलों को संरक्षण के साथ ग्रामीण बच्चों में प्रतिभा की पहचान करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ भी इसमें शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड से लेकर प्रदेश स्तर तक स्पर्धाएं होंगी। इन प्रतियोगिताओं के लिए प्रदेशभर में एकरूप नियम भी तैयार किए जाएंगे। मकसद… ग्रामीण युवाओं में प्रतिभा की पहचान होगी प्रतिभाओं को शहर में मंच
विभाग का कहना है, ग्रामीण और आदिवासी अंचल में पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। कई खेलों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिता का मंच नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों से प्रतिभाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। आधुनिक खेलों से जोड़ेंगे
खेल विभाग के अनुसार, इन प्रतियोगिताओं के जरिए ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए तैयार किया जा सकेगा। इन्हें आधुनिक खेलों से कैसे जोड़ा जाए, इसके लिए भी योजना तैयार की जा रही है। केंद्र स्थापित करेंगे… प्रदेश के विभिन्न अंचलों में देशी खेल प्रचलित हैं। लेकिन, इन्हें बड़े पैमाने पर नहीं खेला जाता है। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन्हें बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें दलीय और व्यक्तिगत दोनों तरह के खेल शामिल किया जाना प्रस्तावित है। -विश्वास सारंग, खेल मंत्री
