क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि अमरकंटक के जंगल में स्थित शिवाबाबा आश्रम में खड़ेश्वरी बाबा उर्फ भोलागिरि की हत्या ने पूरे इलाके को चौंका दिया था। 7 अगस्त 2024 को हुई इस वारदात के बाद बाबा का शव मिला। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। आश्रम से नए मोबाइल का खाली डिब्बा मिला, लेकिन मोबाइल गायब था। हत्या के बाद अमरकंटक और राजेंद्रग्राम में आक्रोश फैल गया। संत समाज और स्थानीय लोगों ने हाईवे पर धरना दिया। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने भी प्रदर्शन कर CBI या CID जांच की मांग की। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आश्रम में रहने वाले बाबा की हत्या किसने की और इसकी वजह क्या थी?
इस पार्ट में पढ़िए आगे की कहानी… पुलिस ने हत्या की वजह जानने के लिए आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान चंद्रशेखर नाम के व्यक्ति ने घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि हत्या से एक रात पहले वह नरेंद्र गिरि के साथ मोटरसाइकिल से गढ़ीदादर स्थित शिवाबाबा आश्रम पहुंचा था। दोनों वहां रात में रुके। अगले दिन वे उमनिया स्थित अवधूत आश्रम गए। यहां उनकी मुलाकात सुल्तान सिंह से हुई। नरेंद्र गिरि ने सुल्तान से सविता (बदला हुआ नाम) को फोन कर आश्रम बुलाने के लिए कहा। इसके बाद उसने सुल्तान को 600 रुपए दिए और शराब व चिकन लाने भेज दिया। सुल्तान अपने साथी ददुआ के साथ सामान लेकर लौटा। आश्रम में चिकन बनाया गया। वहां मौजूद लोगों ने शराब पी और खाना खाया। कुछ देर बाद सविता भी आश्रम पहुंच गई। महिला को देखकर नाराज हो गए बाबा दोपहर बाद सविता और सुल्तान की पत्नी वहां से चली गईं। आश्रम में नरेंद्र गिरि, सुल्तान और ददुआ आराम करते रहे। शाम को सविता दोबारा आई। रात करीब आठ बजे वह आश्रम से चली गई। कुछ समय बाद नरेंद्र गिरि भी बाइक लेकर निकला। रास्ते में उसे सविता मिली। नरेंद्र उसे बाइक पर बैठाकर अपने गुरु भोलागिरि बाबा के आश्रम ले गया। आश्रम में मौजूद सम्हर सिंह ने पुलिस को आगे का घटनाक्रम बताया। उसके मुताबिक, बाबा ने सविता को नरेंद्र के साथ देखा तो नाराज हो गए। उन्होंने शिष्य से पूछा कि वह महिला को आश्रम क्यों लेकर आया है और आश्रम की मर्यादा क्यों खराब कर रहा है। इसी सवाल से विवाद खड़ा हो गया। गुरु ने नरेंद्र गिरि को फटकार लगाई। बात इतनी बढ़ी कि नरेंद्र को आश्रम से चले जाने के लिए कहा गया। जिस व्यक्ति के साथ वह लंबे समय से रह रहा था, उसी गुरु की डांट और बेइज्जती उसे बर्दाश्त नहीं हुई। गुस्से में गुरु पर किया हमला पुलिस के मुताबिक, नरेंद्र गिरि घटना के बाद फरार हो गया था। जांच में उसके खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान जुटाए गए। पुलिस उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह हाथ नहीं आया। करीब ढाई महीने बाद, 30 अक्टूबर 2024 को पुलिस ने उसे झारखंड के जमशेदपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार की। उसके बयान के मुताबिक, महिला को आश्रम लाने पर बाबा ने उसे डांटकर भगा दिया था। इसी अपमान का बदला लेने के लिए उसने विवाद के दौरान गुरु पर हमला कर दिया। नरेंद्र ने बताया कि गुस्से में उसने बाबा की दाढ़ी पकड़कर खींची और उन्हें जमीन पर गिरा दिया। हत्या के बाद मोबाइल और चांदी के सिक्के उठाए पुलिस के सामने अब एक और सवाल था। आश्रम से मोबाइल का खाली डिब्बा तो मिला था, लेकिन बाबा का नया मोबाइल फोन कहां गया? नरेंद्र ने पूछताछ में बताया कि हत्या के बाद उसने बाबा के तख्त के पास रखा मोबाइल फोन और चांदी के दो कीमती सिक्के उठा लिए थे। इसके बाद उसने बाबा के शव पर कपड़ा ढक दिया, ताकि सुबह देखने वाले को लगे कि वे सो रहे हैं। फिर वह रात के अंधेरे में जंगल के रास्ते भाग निकला। कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा पुलिस ने सविता से भी पूछताछ की। उसने नरेंद्र गिरि से जुड़े घटनाक्रम की पुष्टि की, लेकिन जांच में उसकी हत्या में संलिप्तता सामने नहीं आई। इसलिए उसके खिलाफ हत्या के मामले में FIR दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने नरेंद्र गिरि के खिलाफ अपने गुरु भोलागिरि बाबा की हत्या का मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया। मामले की सुनवाई अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम अदालत में हुई। अदालत ने 13 अक्टूबर 2026 को नरेंद्र गिरि उर्फ वीरेंद्र सिंह को खड़ेश्वरी बाबा उर्फ भोलागिरि की हत्या का दोषी ठहराया। उसे आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।
