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RTO अफसरों का स्टिंग;वसूली के लिए लगा रहे बोली:अफसर बोला- मैडम 50 हजार में नहीं मानेंगी, 60 हजार लगेंगे, MP के चेक पॉइंट पर वसूली का सिस्टम

मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2024 को 47 परिवहन चेकपोस्ट बंद किए थे, दावा था कि इससे भ्रष्टाचार रुकेगा। लेकिन भास्कर की एक महीने की पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ। अब उनकी जगह 45 ‘चेक पॉइंट्स’ पर पहले से अधिक संगठित तरीके से वसूली हो रही है। इस नेटवर्क की जांच के लिए भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया। रिपोर्टर डमी ट्रांसपोर्ट फर्म के मालिक बनकर राजस्थान और महाराष्ट्र सीमा के चार प्रमुख चेक पॉइंट्स पर पहुंचे और RTO अधिकारियों से बातचीत की। जांच में सामने आया कि कहीं अधिकारी खुद और कहीं स्टाफ के जरिए डील करते हैं। अधिकारियों ने 15 गाड़ियों के लिए 20–60 हजार रुपये मासिक ‘बंदी’ तय की। उन्होंने अपनी सीमा में सुरक्षा और अन्य जिलों में भी व्यवस्था कराने का भरोसा दिया। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार मध्य प्रदेश के चेक पॉइंट्स से सालाना 1700 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली होती है। ये रकम एमपी सरकार के 27 विभागों के सालाना बजट से ज्यादा है। वसूली का यह सिस्टम कैसे काम कर रहा है, जानिए रिपोर्ट में… भास्कर ने जांच क्यों की?
राजगढ़ के खिलचीपुर चेक पॉइंट का एक वायरल वीडियो जांच की वजह बना। इसमें एक ट्रक चालक से 700 रुपये वसूली की बात सामने आई, जबकि चेकपोस्ट बंद होने के बावजूद वसूली जारी दिखी। इसी के बाद भास्कर ने जमीनी हकीकत जानने के लिए जांच शुरू की। भास्कर टीम ने ऐसे की जांच मैडम का स्टाफ करता है डील भास्कर रिपोर्टर ने 14 मार्च 2026 को राजगढ़ जिले के खिलचीपुर चेक पॉइंट पर तैनात परिवहन अधिकारी से वॉट्सऐप पर संपर्क किया। डमी फर्म का विजिटिंग कार्ड भेजकर मिलने की इच्छा जताई। मैडम ने 15 मार्च को खिलचीपुर चेक पॉइंट पर बुलाया। रिपोर्टर ने कहा कि वो राजस्थान में है। 17 मार्च को फिर मैसेज किया तो बोलीं- मेरा स्टाफ बात करेगा। उसी दिन आरटीओ स्टाफ में पदस्थ नीरज सिंह का कॉल आया। उसने काम पूछा और 20 मार्च के बाद मिलने को कहा। 26 मार्च को रिपोर्टर खिलचीपुर चेकपोस्ट पहुंचा। वहां आरपी सिंह और कॉन्स्टेबल अमित सिंह से बातचीत हुई। रिपोर्टर ने 15 गाड़ियों की लिस्ट दी और सहयोग मांगा। आरपी सिंह: आप बताइए आपको हमसे क्या सपोर्ट चाहिए? रिपोर्टर: हम तो मारवाड़ी लोग हैं, हमारा धंधा प्रभावित नहीं होना चाहिए। आप जैसा बोलेंगे हम वैसा ही करेंगे। अमित सिंह: चेक पॉइंट से नॉर्मल गाड़ी के 700 रुपये हैं, हाइट वाली गाड़ी के 900 रुपये हैं और मंथली बंदी वालों से 4500 रुपए लेते हैं। आप 4 हजार के हिसाब से 60 हजार दे देना। रिपोर्टर: आप 40 हजार में डन करो। अमित सिंह: बीच में मुलताई चेकपोस्ट पड़ेगा, उसका क्या करोगे? मुलताई चेक पॉइंट की 45 हजार में डील कराई
आरपी सिंह ने कॉन्स्टेबल अमित सिंह की बात काटकर कहा- मुलताई को मैं सेट कर दूंगा, तुम इनका 50 हजार महीना फिक्स करो। कॉन्स्टेबल ने कहा- मैडम से पूछना पड़ेगा। कॉन्स्टेबल मैडम से मिलने गया। इधर आरपी सिंह ने रिपोर्टर से बातचीत की और इंस्ट्रक्शन दिए। सिंह ने कहा- इसी बीच कॉन्स्टेबल मैडम से बात कर लौटा और बोला- मैडम ने 50 हजार में मना किया, 60 हजार ही लेंगे। आरपी सिंह ने कहा- 60 हजार में डन करो। मैडम नई हैं। ज्यादा बोलेंगे तो पर्सनल इंटरेस्ट लगेगा। 10 गाड़ियों के लिए 20 हजार की डील भास्कर रिपोर्टर ने 18 मार्च 2026 को नयागांव चेक पॉइंट का प्रभार संभाल रहे आरटीओ अधिकारी पहलवान सिंह भिलाला से उनके नंबर (9753xxxx70) पर संपर्क किया। रिपोर्टर ने कहा कि उनकी गाड़ियां इस चेक पॉइंट से होकर महाराष्ट्र जाती हैं और सपोर्ट चाहिए। भिलाला ने चेक पॉइंट पर बुलाया। 23 मार्च को रिपोर्टर और पीएस भिलाला की मुलाकात हुई। रिपोर्टर ने 10 ट्रकों के नंबर की लिस्ट दी और बताया कि एक ट्रक तीन बार गुजरता है। भिलाला ने कर्मचारी अजय सिंह परिहार को फोन कर कहा-समराथल ट्रांसपोर्ट के प्रतिनिधि सामने हैं, इनकी 10 गाड़ियां हैं। इन्हें दिक्कत नहीं होनी चाहिए, मैं नंबर और लिस्ट भेज रहा हूं। इसके बाद 10 गाड़ियों के लिए 20 हजार रुपए महीना तय किया। रिपोर्टर: 20 हजार ज्यादा हो जाएंगे, 15 हजार कर दीजिए। भिलाला: गाड़ी घोड़े हैं साहब… आप तो चलाइए। कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऊपर वाले सब ईमानदारी का चोला पहनकर बैठे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। रिपोर्टर: सेंधवा बैरियर पर आपका कॉन्टैक्ट है क्या? भिलाला: वहां मनोज नाम का लड़का है, वो आपका काम कर देगा। उज्जैन से सेंधवा तक की डील का ऑफर
इसके बाद भिलाला ने मनोज को कॉल कर कहा- समराथल रोडलाइन्स वाले आए थे। इनकी 10 गाड़ियां चलती हैं। नयागांव चेक पॉइंट के लिए आए हैं। मैंने फिक्स कर लिया है। तू अपने हिसाब से देख लेना। भिलाला ने मनोज का नंबर रिपोर्टर को दिया और कहा- नीमच से सेंधवा तक पूरा इलाका अपना ही है। साथ ही उज्जैन में भी डील कराने का ऑफर दिया। चेक पॉइंट से सालाना 1700 करोड़ की वसूली
चेक पॉइंट 1 जुलाई 2024 से शुरू हुए थे। एक साल 9 महीने में यहां से 3 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली हो चुकी है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक एमपी से रोजाना 70 हजार ट्रक गुजरते हैं। चेक पॉइंट्स पर एक ट्रक से 700 रुपए वसूले जाते हैं। इससे एक दिन में 4 करोड़ से ज्यादा की कमाई होती है। महीने में यह आंकड़ा 147 करोड़ रुपए होता है। इस तरह एक साल में चेक पॉइंट्स से 1764 करोड़ रुपए की वसूली होती है। यह मप्र सरकार के 27 विभागों के सालाना बजट से ज्यादा है। परिवहन विभाग का बजट 230 करोड़ रुपए है, जबकि इसी विभाग के चेक पॉइंट्स से सात गुना ज्यादा वसूली हो रही है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सीएम को लिखा पत्र
इंदौर ट्रक ऑपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर ‘फूल प्रूफ’ वसूली तंत्र की शिकायत की है। एसोसिएशन के मुताबिक, चेक पोस्ट बंद होने के बाद भी अधिकारी सरकारी वाहनों में बैठकर सड़कों पर अवैध वसूली कर रहे हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के चेयरमैन सीएल मुकाती का कहना है कि परिवहन चेकिंग पॉइंट अपने उद्देश्य से भटक गए हैं। आए दिन वाहन चालकों और चेकिंग पॉइंट कर्मचारियों के बहस और एंट्री के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। अफसर बोले- सबूत मिले तो एक्शन लेंगे
भास्कर ने इस मामले में परिवहन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर किरण शर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता के लिए अमले को बॉडी वार्न कैमरा दिए गए हैं। नकद वसूली की शिकायतों के कारण पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल मशीनें) भी दी गई हैं। 700 रुपए एंट्री फीस के सवाल पर उन्होंने कहा-ऐसी शिकायत आती है तो तत्काल कार्रवाई करते हैं। अब तक कॉन्स्टेबल से टीआई तक 13-14 लोगों पर कार्रवाई हुई है। कुछ को सस्पेंड और कुछ को मुख्यालय अटैच्ड किया गया है। भविष्य में भी शिकायत पर कार्रवाई करेंगे। समझिए चेक पोस्ट और चेक पॉइंट का अंतर जीतू बोले- रेट फिक्स हैं और पूरा सिस्टम सेट है एमपी कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भास्कर की खबर का स्क्रीन शॉट X पर शेयर करते हुए लिखा- मध्य प्रदेश के चेक पॉइंट की वसूली 27 विभागों के बजट से ज्यादा है! भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर मोहन यादव जी ने पिछले साल 47 चेकपोस्ट बंद किए थे, जिसके बाद बचे हुए 45 चेकपॉइंट में अकल्पनीय लूट जारी है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में साफ दिख रहा है कि कैसे मोहन यादव जी के अधिकारियों के संरक्षण में महीनों की बंदी तय होती है, रेट फिक्स हैं और पूरा सिस्टम सेट है।

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