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RSS प्रमुख बोले-भारत जरूर बनेगा विश्वगुरु, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर पहले लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है

राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। लेकिन आज वह मंदिर सबके सामने साक्षात खड़ा है। ठीक उसी प्रकार, भारत का विश्वगुरु के रूप में पुनरुत्थान भी पूरी तरह निश्चित है और इस यात्रा को रोका नहीं जा सकता। भागवत ने यह बात नागपुर में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में बनने वाले भारत दुर्गा शक्ति स्थल मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में कही। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी मित्रानंदजी महाराज, साध्वी ऋतंभरा और धीरेन्द्र शास्त्री सहित कई धार्मिक नेता भी मौजूद थे। भारत के भविष्य पर संदेह न करें- भागवत
RSS चीफ ने कहा- देश के भविष्य को लेकर कोई संदेह न रखें और साहस व आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीएं। उनके मुताबिक, अगर लोग अपने संकल्प के अनुसार कदम-दर-कदम आगे बढ़ें, तो भारत मजबूत और नैतिक रूप से सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के माध्यम से साकार होगा, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह का परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा- भारत के भविष्य पर संदेह न करें। साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जिएं और इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। भारत मजबूत होगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। लोगों को संदेह था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन यह बन गया। उसी प्रकार भारत का विश्वगुरु बनना निश्चित है। पश्चिमी चश्मे को उतार फेंकने की जरूरत- भागवत
डॉक्टर भागवत ने कहा कि भारत को यदि वास्तव में समझना है, तो इसे इसकी अपनी सभ्यता और सनातन मूल्यों की दृष्टि से देखना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में विकसित हुई पश्चिमी सोच से भारत को नहीं समझा जा सकता। नागरिकों को इस विदेशी विचारधारा की परतों को उतार फेंकना होगा। यदि हम अपने संकल्प के अनुसार कदम दर कदम आगे बढ़ें, तो भारत मजबूत, सदाचारी और वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा। भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए, लोगों को पहले भारत को गहराई से समझना होगा और फिर उसे अपने दैनिक जीवन में उतारना शुरू करना होगा। पश्चिमी सोच को त्यागकर भारतीय परंपराओं से जुड़ें-भागवत
आरएसएस प्रमुख ने नागरिकों से पश्चिमी सोच को त्यागने और विचार एवं व्यवहार में भारतीय परंपराओं से दोबार जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन दैनिक जीवन में छोटे लेकिन सार्थक बदलावों से शुरू होगा, जैसे कि भाषा, पहनावा, खान-पान की आदतें और सांस्कृतिक प्रथाएं। भारत को जानना, स्वीकार करना और दैनिक जीवन में जीना जरूरी है। इस बात पर जोर देते हुए कि आत्म-साक्षात्कार की ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से ही एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। ——————- मोहन भागवत से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… हिंदू समाज में एकता की कमी:ये बार-बार गुलामी की बड़ी वजह; हेडगेवार ने एकता और आजादी के लिए RSS बनाया था राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को विदेशी शासन से आजाद कराने और हिंदुओं के बीच फूट को खत्म करने के मकसद से RSS की स्थापना की थी। हेडगेवार का मानना था कि समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी की बड़ी वजह रही। पूरी खबर पढ़ें…

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