पुलवामा आतंकी हमले में शामिल आतंकवादी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि PoK के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने हमजा बुरहान को निशाना बनाकर कई गोलियां चलाईं। हमजा की मौके पर ही मौत हो गई। भारत ने 2022 में हमजा बुरहान को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और PoK में सक्रिय था। बुरहान मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर मारा गया। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी था। उसे 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश रचने वालों में शामिल माना जाता था। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा है। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता है और संगठन की आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग भी करता है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह पुलवामा में विस्फोटक बरामदगी के मामलों, 18 नवंबर 2020 को CRPF जवानों पर हुए ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे 14 फरवरी 2019 क दिन था। दुनिया वैलेंटाइन डे मना रही थी। उसी दिन CRPF का एक काफिला श्रीनगर-जम्मू हाईवे से गुजर रहा था। ट्रक पुलवामा के पास पहुंचा था, तभी एक सुसाइड अटैकर 200 किलो RDX लदी मारुति ईको कार लेकर घुस गया। विस्फोट इतना तेज था कि सुरक्षाबलों को लेकर जा रही 2 बसों के परखच्चे उड़ गए। 10 किमी दूर तक धमाके की आवाज सुनाई दी। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए। ये कश्मीर में 30 साल से जारी आतंकवाद के दौर का अब तक का सबसे बड़ा हमला था। इस हमले को आज 5 साल पूरे हो चुके हैं। खबर अपडेट हो रही है…
