पीएम मोदी ने दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें एडिशन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के प्लांट्स से निकलने वाली चिप्स अब देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचने लगी हैं। मोदी ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया का आयोजन भारत की बड़ी उपलब्धियों के बीच एक अहम पड़ाव है। पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ भारत की इकोनॉमी बढ़ रही है, दूसरी तरफ दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है। उन्होंने सितंबर में जारी तिमाही GDP रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण दौर में भी भारत ने 7.8% की ग्रोथ हासिल की। इसी दौरान जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड की, जो करीब 35 साल बाद हुआ है। मोदी ने सेमीकॉन इंडिया के अब तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि 2022 में पॉलिसी पर चर्चा से शुरुआत हुई थी, फिर प्रोजेक्ट्स, फाइल साइनिंग और फाउंडेशन स्टोन तक बात पहुंची। पिछले साल पायलट लाइंस और टेस्ट चिप्स की चर्चा हुई, जबकि इस साल कमर्शियल प्रोडक्शन की बात हो रही है। उन्होंने बताया कि दो और प्लांट्स में भी कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है। पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें 1. सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज शुरू: मोदी ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज लॉन्च किया है। पहले फेज की वैल्यू करीब 8 अरब डॉलर थी, जबकि दूसरे फेज के लिए 13.5 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है। 2. AI के लिए नई टेक्नोलॉजी पर जोर: पीएम ने कहा कि कंपाउंड सेमीकंडक्टर के मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सिलिकॉन फोटोनिक्स को इकोसिस्टम में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये सभी चीजें AI को सक्षम बनाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी हैं और इस दिशा में मिलकर आगे बढ़ना होगा। 3. सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने पर फोकस: मोदी ने कहा कि भारत सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है और इसके लिए कई रिफॉर्म किए गए हैं। उन्होंने इक्विपमेंट कंपनियों के नेताओं से इन अवसरों का फायदा उठाने की अपील की। 4. विदेशी कंपनियों के लिए सहयोग के नए रास्ते: उन्होंने कहा कि अब इंटरनेशनल कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन फर्म्स और OCI के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ सहयोग कर सकती हैं। सरकार पॉलिसी, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के स्तर पर जरूरी कदम उठा रही है। 5. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ से सेमीकंडक्टर सेक्टर में बदलाव: मोदी ने कहा कि भारत ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर आगे बढ़ रहा है और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी नए सुधार किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य प्रोजेक्ट्स को सफल बनाने के लिए जरूरी पॉलिसी, फंडिंग और रेगुलेटरी सपोर्ट उपलब्ध कराना है। 52 देशों की 600+ कंपनियां होंगी शामिल इस बार सेमीकॉन इंडिया में 600 से ज्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं। कार्यक्रम में 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए हैं। इवेंट में एएसएमएल, एप्लाइड मैटेरियल्स, टेराडाइन, इन्फिनियन, एनएक्सपी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रॉन, लैम रिसर्च, सीजी पावर, एडवांटेस्ट और टोक्यो इलेक्ट्रॉन समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हो रही हैं। इन कंपनियों के बीच निवेश, तकनीक और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। आयोजन में नई कारोबारी साझेदारियों और सहयोग के अवसर भी तलाशे जाएंगे। प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन होंगे। इसके अलावा कई भारतीय राज्यों के पवेलियन भी लगाए जाएंगे। भारत में अब तक 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अब तक 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इनमें से पहले चरण में मंजूर तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। केंद्र ने सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका फोकस देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने पर है। चिप डिजाइन पर भी फोकस सरकार के मुताबिक, 400 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप्स को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 24 स्टार्टअप्स को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव यानी DLI योजना के तहत मंजूरी मिली है। इसके जरिए देश में चिप डिजाइन और इससे जुड़ी तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर क्यों जरूरी है? सेमीकंडक्टर की बढ़ती जरूरत को देखते हुए भारत चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य चिप की सप्लाई के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना और देश में इस क्षेत्र से जुड़े कारोबार और तकनीक को बढ़ावा देना है।
