ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करने की कवायद के बीच मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को इस मामले में लीगल नोटिस भेजा है। यह नोटिस हाईकोर्ट के फैसले पर अमल नहीं किए जाने के मामले में पीएससी परीक्षा के सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की ओर से भेजा है। यह लीगल नोटिस पीएससी परीक्षा के 13 प्रतिशत पद होल्ड किए जाने के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी परिणाम घोषित नहीं किए जाने के मामले में दिया है। अधिवक्ता अंशुल तिवारी की ओर से यह नोटिस जारी किया है। तिवारी ने नोटिस जारी करने की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं कर रही है। 9 अक्टूबर को घोषित किया था असंवैधानिक हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण संबंधी एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। साथ ही पीएससी, ईएसबी और अन्य चयन एजेंसियों को निर्देश दिए गए थे कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सिर्फ 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण के आधार पर रिजल्ट जारी करें। कोर्ट ने होल्ड किए गए 13 फीसदी पद अनारक्षित श्रेणी को देने के आदेश दिए थे और इस पर अमल के लिए कहा था। अब इस मामले में लीगल नोटिस भेजा है। इन्हें भेजा है लीगल नोटिस यह लीगल नोटिस सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों ने भेजा है। ये उम्मीदवार पीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में 13 फीसदी श्रेणी के तहत इंटरव्यू दे चुके हैं। इनके रिजल्ट फिलहाल होल्ड हैं। नोटिस मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव को भेजा है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रमुख सचिव और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को भी नोटिस भेजा है। उम्मीदवारों की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने नोटिस भेजा है। अधिवक्ता तिवारी सामान्य वर्ग की ओर से हाईकोर्ट में इस मामले की पैरवी कर चुके हैं।
