जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के दो हिस्सों में किए गए पुनर्गठन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश की इकलौती मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के बंटवारे में जबलपुर के साथ भेदभाव किया गया। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका के मुताबिक, पुनर्गठन के बाद जबलपुर विश्वविद्यालय के हिस्से में 4 संभाग आए हैं, जबकि उज्जैन में गठित धन्वंतरि विश्वविद्यालय को 6 संभाग दिए गए हैं। यह याचिका जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे सहित अन्य की ओर से दायर की गई है। इसमें राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम और मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिले अधिकार का उल्लंघन है। विशेषज्ञ अध्ययन के बिना पुनर्गठन का आरोप याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि विश्वविद्यालय के पुनर्गठन से पहले किसी विशेषज्ञ समिति से अध्ययन या व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार नहीं कराई गई। याचिका में इसी आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। 250 करोड़ के रिजर्व फंड का मामला भी उठा याचिका में विश्वविद्यालय के करीब 250 करोड़ रुपए के रिजर्व फंड के बंटवारे पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि इसमें से 70% राशि उज्जैन विश्वविद्यालय को दी जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने फंड के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। ये खबर भी पढ़ें… MP के 2 IAS के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जबलपुर हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दोनों को 21 सितंबर 2026 को कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों अधिकारियों पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप है।पूरी खबर पढ़ें
