मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कालेज मान्यता फर्जीवाड़े मामले पर हाईकोर्ट में आज मंगलवार को एक बार फिर से सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि सभी 800 नर्सिंग कालेजों का रिकॉर्ड पेश करे। इसके साथ ही यह पूछा कि जांच के दौरान जो 600 कालेज अपात्र मिले थे, अभी तक उन पर क्यों कानूनी कार्रवाई नहीं की है?। सुनवाई करते समय अदालत ने नर्सिंग काउंसिल से भी जवाब मांगा है कि अपात्र कालेजों को मान्यता देने में आखिर किसकी मिली भगत है, उन अधिकारियों की सूची पेश करों। कोर्ट ने 12 मई तक रिपोर्ट मांगी है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई से पूर्व विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई तक यह स्पष्ट करे कि अब तक की जांच में किन-किन व्यक्तियों या संस्थानों की संलिप्तता पाई गई है,साथ ही, सीबीआई को यह भी बताना होगा कि दोषियों के विरुद्ध अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है ?। इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को विशेष रूप से उन अधिकारियों के विरुद्ध उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है, जो समय-समय पर अनुपयुक्त और मानक विहीन कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार थे। संबंधित प्रतिवादियों को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से उन प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों का विवरण हो, जो इन कॉलेजों को अवैध रूप से फलने-फूलने देने वाले अधिकारियों पर की गई हैं । यह था मामला
