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GAD ने पूछा- कौन IAS कब-कहां तक रहा पदस्थ:10 दिन में सभी विभागों से मांगी जानकारी; यह भी बताना होगा- कितना वेतन मिला, कितना कटा

मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों और जिलों में कौन से आईएएस अफसर कब से कब तक पदस्थ रहे हैं और इस दौरान उन्हें कितना वेतन मिलता रहा है? उनके वेतन से कितनी राशि की कटौती की जाती रही है। सेवा काल के दौरान कितने अवकाश उनके द्वारा लिए गए हैं। राज्य सरकार इसकी जानकारी जुटा रही है। इसको लेकर सभी विभागों और विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर 30 जून तक जानकारी भेजने के लिए कहा गया है। प्रदेश के सामान्य कर्मचारी की पेंशन और अन्य वेतन भत्तों के निराकरण में सरकार भले ही समय पर एक्शन नहीं ले पाए और कर्मचारियों अधिकारियों को अपना भुगतान पाने के लिए इंतजार करना पड़े लेकिन आईएएस अधिकारियों के मामले में किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए। आईएएस अफसर का सर्विस रिकाॅर्ड पूरी तरह से मेंटेन रहे, इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि सभी अधिकारी अपना तीन साल का पूरा हिसाब किताब खुद देंगे ताकि विभाग उनके सभी प्रकरणों का निराकरण समय पर कर सके। 2023 से 2026 तक का सेवा सत्यापन ब्यौरा सामान्य प्रशासन विभाग ((जीएडी) से जारी निर्देश में कहा है कि प्रदेश के सभी आईएएस अधिकारियों का वर्ष 2023 से 2026 तक का सेवा सत्यापन ब्यौरा चाहिए। इसके लिए जीएडी ने सभी विभागों एवं कार्यालय प्रमुखों को निर्देश जारी करते हुए 30 जून 2026 तक आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें कहा है कि आईएएस अधिकारियों का सेवा सत्यापन विवरण राज्य शासन को भेजा जाएगा, ताकि सेवानिवृत्ति के समय पेंशन संबंधी मामलों का समय पर निराकरण किया जा सके। शासन का मानना है कि सेवा अभिलेखों का संकलन पहले से होने से भविष्य में इन अधिकारियों के स्वत्वों के भुगतान में प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में देरी नहीं होगी। कब कहां पदस्थ रहे, कितना वेतन मिला, कितना कटा सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस अधिकारियों से वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 का डिटेल सेवा सत्यापन विवरण मांगा है। इसके लिए एक फॉर्मेट भी जारी किया है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को वेतन भुगतान, भत्तों और कटौतियों की माहवार जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके अलावा इन वर्षों के दौरान अधिकारियों की पदस्थापना, स्थानांतरण, अवकाश अवधि तथा अन्य सेवा संबंधी विवरण भी फार्मेट में शामिल किए जाएंगे। बताया जाता है कि समयसीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना सभी विभागों और कार्यालय प्रमुखों के लिए अनिवार्य किया है।

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