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MP में 44% बारिश कम, 45 जिले पिछड़े:इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर में भी सूखा; मानसून की एंट्री 25 जून तक

इस बार मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 8 से 10 दिन लेट हो सकता है। IMD (मौसम केंद्र) ने प्रदेश में 25 जून तक मानसून की एंट्री का अनुमान जताया है। इससे पहले प्री-मानसून की एक्टिविटी जारी रहेगी। शनिवार को भोपाल-इंदौर समेत 38 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में सामान्यतः 15 जून के आसपास मानसून की एंट्री हो जाती है, लेकिन इस बार 20 जून तक मानसून का कोई संकेत नहीं मिला है। तेलंगाना में 8 जून से ही मानसून ठहरा हुआ है। यदि एक-दो दिन में यह आगे बढ़ता है और इसकी रफ्तार तेज रहती है, तो मध्य प्रदेश में 25 जून के आसपास पहुंच सकता है। मानसून के लेट होने से जून की सामान्य बारिश का आंकड़ा भी तेजी से घट रहा है। प्रदेश में 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में 65 प्रतिशत पानी कम गिरा है। पश्चिमी हिस्से के संभाग- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम में आंकड़ा 27 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 55 में से 45 जिलों में बारिश का आंकड़ा माइनस में है। सबसे अच्छी स्थिति में भोपाल है। यहां पर 62 प्रतिशत पानी ज्यादा गिरा है। अब तक ढाई इंच के मुकाबले 4 इंच बारिश हो चुकी है। अलीराजपुर ऐसा जिला है, जहां पर बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई है। मानसून लेट…किसान सबसे ज्यादा चिंता में
मानसून के लेट होने से किसान सबसे ज्यादा चिंता में है। वे खरीफ सीजन की फसल जैसे- सोयाबीन, उड़द, मूंग, तूअर आदि की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ बताते हैं कि बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी आती है। इतनी बारिश होने के बाद ही किसान बोवनी करें। बीज खराब होने का खतरा बढ़ा
मानसून के समय पर आने की संभावना के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी। उन पर बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पानी के आभाव में बीज खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। हालांकि, उन किसानों के लिए राहत है, जिनके पास सिंचाई के लिए पानी है। राजगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में बारिश, दिन का पारा लुढ़का
प्रदेश में शुक्रवार को राजगढ़, दमोह, रीवा, सतना, मैहर समेत कई जिलों में बारिश हुई। इस वजह से दिन के तापमान में गिरावट देखी गई। मौसम विभाग के अनुसार, सिवनी में पारा सबसे कम 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 34.5 डिग्री, पचमढ़ी में 34.8 डिग्री, शिवपुरी में 35.2 डिग्री रहा। खजुराहो में सबसे ज्यादा 42.4 डिग्री रहा। वहीं, दतिया में 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 35.1 डिग्री, भोपाल में 37.3 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री और ग्वालियर में 40 डिग्री दर्ज किया गया। बारिश नहीं होने से परेशान किसान… आगर-मालवा, सीहोर में तेज आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने शनिवार को आगर-मालवा और सीहोर में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार और खरगोन में तेज धूप निकल सकती है। पिछले 10 साल में कब-कब आया मानसून… इन जिलों में कम बारिश
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, रीवा, पन्ना, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं, भोपाल, आगर-मालवा, अशोकनगर, गुना, मंदसौर, मुरैना, नीमच, सीहोर, शाजापुर और श्योपुर में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है। 15 जून सामान्य तारीख, 2021 में पहले आया था
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में मानसून 15 जून तक एंटर हो जाता है। पिछले 10 साल में 2021 में मानसून 9 जून को ही प्रवेश कर गया था। सबसे लेट एंट्री 2018 में 25 जून को हुई थी। पिछले साल 2025 में मानसून 16 जून को ही आ गया था और पूरे प्रदेश में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा था। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी
राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 3 साल तो तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी। वहीं, पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था। इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश
जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 7 साल यानी- 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.6 डिग्री के बीच रहा है। पिछले साल तापमान 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल साढ़े 5 इंच पानी गिरा था। बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 में इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्परेचर
ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री और 2025 में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है। मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 को पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1952 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2025 में यहां पूरे महीने 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश
मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यहीं से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2016 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटे की 30% तक बारिश जून में ही हुई। पिछले साल साढ़े 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर संभाग के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, जबलपुर में 1998 में एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 16 जून 1882 को 24 घंटे में साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड
जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2016 से 2025 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। उज्जैन में बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1970 में पूरे महीने साढ़े 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था। इस दिन करीब साढ़े 6 इंच बारिश हुई थी। साल 2025 में पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।

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