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BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद:चिदंबरम ने पूछा- देश को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच पर लाना भारत की ताकत

भारत में BRICS समिट को लेकर कांग्रेस के दो सीनियर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पूछा था कि पहले हुई समिट से भारत को क्या फायदा हुआ। एक दिन बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने समिट के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि भारत में सम्मेलन होना देश की कूटनीतिक ताकत को दिखाता है। 11 देशों के बड़े नेताओं का भारत आना और उन्हें एक मंच पर लाना भारत की दूसरे देशों को साथ लाने की क्षमता को दर्शाता है। 18वें BRICS समिट का आयोजन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, टेक्नोलॉजी और एनर्जी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चिदंबरम ने कहा था- इन संगठनों की सदस्यता पर विचार हो थरूर के बयान से एक दिन पहले चिदंबरम ने सवाल किया था कि भारत BRICS के अलावा G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है, लेकिन इन संगठनों से देश को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है, इस पर विचार होना चाहिए। थरूर ने कहा- BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए जरूरी मंच थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस समूह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। थरूर बोले- BRICS के सामने कई चुनौतियां भी; 5 पॉइंट्स 1. BRICS में मतभेद: सभी सदस्य देशों की विदेश नीति और हित एक जैसे नहीं हैं। इसलिए बड़े वैश्विक मुद्दों पर सहमति बनाना मुश्किल है। 2. ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन मुद्दा: मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में इन मुद्दों पर मतभेद सामने आए। साझा बयान जारी नहीं हो सका। 3. भारत की चेयर डिक्लेरेशन: संयुक्त बयान की जगह भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर डिक्लेरेशन जारी किया। 4. आगामी सम्मेलन की चुनौती: अगर बड़े मुद्दों पर फिर सहमति नहीं बनी तो BRICS की एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। इसे भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती माना जाएगा। 5. व्यापार घाटा भी चिंता: BRICS देशों को भारत का निर्यात कम है, जबकि वहां से आयात ज्यादा है। यानी भारत BRICS देशों से ज्यादा सामान खरीद रहा है। BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना चिदंबरम के बयान के बाद BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने थरूर के बयान को चिदंबरम की टिप्पणी के विपरीत बताते हुए कांग्रेस में मतभेद होने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा- थरूर का BRICS समिट को भारत के लिए बड़ी प्रतिष्ठा बताना कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय को दिखाता है। BJP ने इसी विरोधाभास को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला किया। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। —————————— ये खबर भी पढ़ें… पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे, भारत-रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट डील संभव भारत और रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट की डील पर आज समझौता हो सकता है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक होगी। बातचीत में रूस की तरफ से भारत में Su-57 के प्रोडक्शन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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