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सबरीमाला केस, आज 5वें दिन सुनवाई:कल SC ने कहा था- करोड़ों की आस्था को गलत ठहराना मुश्किल; मंदिर मैनेजमेंट बोला- महिलाएं क्यों आना चाहती हैं

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज 5वें दिन सुनवाई होगी। आज भी मंदिर प्रबंधन और याचिकाकर्ताओं के बीच आस्था बनाम संवैधानिक अधिकारों को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है। 9 जजों की बेंच ने कल कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। वहीं मंदिर प्रशासन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने कहा कि सबरीमाला कोई खिलौने की दुकान या रेस्टोरेंट का मामला नहीं है। यहां के देवता ब्रह्मचारी हैं। भारत में अयप्पा के लगभग 1,000 मंदिर हैं। अगर महिलाओं को दर्शन करना है, तो वहां जाएं। उन्हें इसी खास मंदिर में क्यों आना है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछले 4 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही 9 जजों की बेंच कर रही सबरीमाला केस की सुनवाई सबरीमाला सहित 5 मामले, जिन पर SC फैसला करेगा

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