बालाघाट के बैहर क्षेत्र के बिरसा विकासखंड के बैगा आदिवासी गांवों में 32 बच्चों की मौत के मामले को लेकर बिग बॉस-12 फेम सौरभ पटेल ने बुधवार शाम सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। प्रभावित गांवों के दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने वायरल वीडियो में दिखाए गए गंदे पानी का जिक्र किया। सौरभ ने कहा कि अगर बच्चों की मौत लापरवाही से हुई है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है। उनके बयान पर आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई है। वायरल वीडियो का जिक्र कर पानी पीने की बात कही सौरभ पटेल ने बताया कि बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद वे आदिवासी इलाके के गांवों में पहुंचे थे। उन्होंने वहां शासन-प्रशासन की ओर से की जा रही व्यवस्थाएं देखीं और आदिवासी परिवारों से बातचीत की। उन्होंने सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके के वायरल वीडियो का भी जिक्र किया। वीडियो में एक नल से पानी दिखाया गया था। सौरभ ने कहा कि उन्होंने उसी नल का पानी पिया है, जबकि उनके वीडियो में नल के नीचे रखे बर्तन में पानी गंदा दिखाई दे रहा था। सौरभ पटेल ने कहा- स्थानीय आदिवासियों की अपनी जीवन शैली और संस्कृति है, जिसे ज़बरदस्ती नहीं बदला जा सकता। डॉक्टर पर अविश्वास के कारण वहां अवेयरनेस की सख्त जरूरत है, क्योंकि किसी सदस्य की मृत्यु होने पर वे उस घर को छोड़ देते हैं। उनका मानना है कि हाल ही में नक्सलवाद खत्म होने के बाद ही यह क्षेत्र सही मायनों में आज़ाद हुआ है, और यदि यहाँ बच्चों की मौत सरकार की लापरवाही से हुई है, तो इसकी ज़िम्मेदार सरकार है। बिग बॉस को लेकर भी बोले सौरभ सौरभ पटेल ने टीवी, वेब सीरीज और दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपने अभिनय के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बिग बॉस में प्रतिभागियों के चयन को लेकर कहा कि पहले आम लोगों को भी मौका दिया जाता था, लेकिन अब सोशल मीडिया के व्यूज के आधार पर प्रतिभागियों का चयन किया जा रहा है। आदिवासी समाज ने घर छोड़ने वाले बयान पर जताई आपत्ति सौरभ पटेल ने बच्चों की मौत के बाद परिवारों के घर छोड़ने और नक्सलवाद खत्म होने के बाद बैगा आदिवासियों को मिली ‘आजादी’ को लेकर भी बयान दिए थे। इन बयानों पर आदिवासी समाज के नेता शुभम उईके ने आपत्ति जताई है। शुभम उईके ने कहा कि कुछ घरों में ऐसी स्थिति दिखाई दे सकती है, लेकिन परिवार घर छोड़कर नहीं जाते। देवाई कार्यक्रम के बाद वे अपने घर वापस लौट आते हैं। आदिवासी समाज के विकास को लेकर सवाल शुभम उईके ने ‘आजादी’ वाले बयान पर कहा कि आदिवासी समाज को आज भी विकास के नाम पर पूरी आजादी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाज के लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के नाम पर फंड खर्च किया गया, लेकिन उसका इस्तेमाल आदिवासियों के विकास के लिए नहीं हुआ।
