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एमपी में मकान बनाना 35% तक महंगा:सीमेंट-ईंट, टाइल्स-सेनेटरी आइटम्स के रेट बढ़े, 1 हजार वर्गफीट पर मकान बनाने की लागत अब 16 लाख रुपए

ईरान-इजराइल और अमेरिका युद्ध का असर अब आम आदमी की रसोई तक सीमित नहीं रहा। यह घर के सपने पर भी भारी पड़ रहा है। युद्ध की वजह से मकान निर्माण सामग्री की कीमतों में आई तेजी ने मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पेंट, टाइल्स, वायरिंग, बाथरूम फिटिंग, पाइप फिटिंग, सीमेंट और सरिया के दाम बढ़ चुके हैं। इससे एक हजार स्क्वायर फीट पर मकान बनाने की लागत औसतन 30 से 35 फीसदी बढ़ गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक इसमें आगे भी बढ़ोतरी की आशंका है। इस केस स्टडी से समझिए मकान बनाने की लागत कैसे बढ़ी है… 1 हजार स्क्वायर फीट पर लागत 3.5 लाख रुपए बढ़ी
इंदौर की एक निजी कंपनी के कर्मचारी रमेश कुमार ने पिछले साल 1000 वर्गफीट का घर बनाने की योजना बनाई थी। उस समय अनुमानित लागत 12.5 लाख रुपए थी। लेकिन निर्माण के आखिरी चरण तक पहुंचते-पहुंचते यह लागत बढ़कर 16 लाख रुपए से अधिक हो गई। यानी करीब 3.5 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ उन पर आ गया। अब जानिए किस सेक्टर पर क्या असर पड़ा 1.टाइल्स और सेनेटरी : मोरबी के प्लांट बंद, सप्लाई चेन टूटी
देश की 80% टाइल्स सप्लाई करने वाले मोरबी (गुजरात) के लगभग 90% प्लांट बंद होने की कगार पर हैं। कच्चे माल की कमी और गैस की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन ठप कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि 2×4 साइज की टाइल्स, जो 32 रुपए में मिलती थी, अब 45 रुपए तक पहुंच गई है। टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन के सचिव प्रेम माहेश्वरी के अनुसार यदि युद्ध जारी रहा तो अगले 15 दिनों में कीमतों में 20-30 पर्सेंट का और उछाल आ सकता है। ग्राहक को उपलब्ध स्टॉक में से ही चुनाव करना पड़ रहा है। 2. इलेक्ट्रिकल फिटिंग – कॉपर और एल्युमिनियम के दाम 35% बढ़े
महारानी रोड ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र रामनानी के अनुसार कच्चे माल के संकट ने बिजली के सामान को 35% तक महंगा कर दिया है। एक एमएम वायर का बंडल 990 रुपए से बढ़कर 1560 रुपए हो गया है। पंखे, एलईडी और स्विच प्लेट्स की कीमतों में औसतन 400 से 500 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। रामनानी के मुताबिक जो काम पहले 10 लाख में हो रहा था, अब 15 लाख में हो रहा है। कॉपर और एल्युमिनियम में तेजी है। बाजार में कैश फ्लो की कमी है। आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे। 3. प्लंबरिंग और बाथरूम फिटिंग पर क्रूड ऑयल और ब्रास का असर
पीवीसी का सीधा संबंध क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) से है। तेल महंगा होने से पाइप भी महंगा हुआ है। 350 रुपए वाला सीपीवीसी पाइप अब 490 रुपए में मिल रहा है। आयात रुकने से नल और डायवर्टर के दाम 25 से 40% बढ़ गए हैं। सेनेटरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील गोयल के अनुसार बाथरूम फिटिंग ब्रास से बनती है और इसका कच्चा माल देश में सीमित है। युद्ध की वजह से ब्रास आयटमों में करीब 25 परसेंट रेट बढ़े हैं। पीवीसी पाइप-फिटिंग के रेट भी बढ़ गए हैं। 4. रंग रोगन करवाना भी हुआ महंगा
इंदौर सियागंज के पेंट्स कारोबारी गुलाम अली के अनुसार कच्चे माल के रेट रोज बढ़ रहे हैं। कंपनी लेवल पर प्रीमियम सेगमेंट के प्रोडक्ट के रेट में करीब 50 रुपए प्रति लीटर बढ़ोतरी हुई है। रेट बढ़ने के साथ सप्लाई भी शॉर्ट है। सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही है। आम आदमी की जेब पर ‘दोहरी मार’
सीमेंट पर जीएसटी का गणित भी ग्राहकों को परेशान कर रहा है। व्यापारियों के अनुसार जीएसटी 28% से घटकर 18% होने के बावजूद कीमतें फिर वहीं आ गई हैं। यानी टैक्स कम होने का लाभ महंगाई ने निगल लिया है। मकान बना रहे हैं तो 30 पर्सेंट का बफर लेकर चलें
इंदौर के बाजारों में इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति है। बाजार में कैश फ्लो की कमी से व्यापारी परेशान हैं, और ग्राहक का होम लोन व बजट छोटे पड़ रहे हैं। मकान बनाने की योजना बना रहे लोग बजट में 30 पर्सेंट का ‘बफर’ लेकर चलें, वरना फिनिशिंग के वक्त काम रोकना पड़ सकता है।

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