आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा रहे मरीजों के लिए बुरी खबर है। ग्वालियर के 38 निजी अस्पतालों सहित प्रदेश के कुल 120 अस्पतालों पर योजना से बाहर होने की तलवार लटक गई है। नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) का अनिवार्य सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण प्रदेश भर के 120 अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को ‘अंतिम चेतावनी’ जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि इस सप्ताह के भीतर कमियां दूर नहीं की गईं, तो उनका ‘आयुष्मान ब्रेक’ लग जाएगा, यानी उन्हें पोर्टल से डी-पैनल (पैनल से बाहर) कर दिया जाएगा। छोटे अस्पताल करते हैं सबसे ज्यादा इलाज राज्यभर के लगभग 90% निजी अस्पताल अभी एंट्री लेवल एनएबीएच पर ही कार्यरत हैं। ये वही अस्पताल हैं जहां आयुष्मान कार्ड धारकों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इन अस्पतालों पर ग्रामीण और शहरी गरीबों का सीधा भरोसा है। वहीं दूसरी ओर फुल एनएबीएच वाले अस्पताल ज्यादातर कॉरपोरेट या फाइव स्टार हॉस्पिटल होते हैं, जहां गंभीर या विशेष बीमारियों का इलाज होता है और आमतौर पर वहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराना मुश्किल होता है। जिले में 20 सरकारी और 73 प्राइवेट हॉस्पिटलों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को इलाज मिल रहा है। इनमें से 35 अस्पताल ही ऐसे हैं जो एनएबीएच प्रमाणित हैं। वर्तमान में 38 अस्पताल एनएबीएच प्रमाणित नहीं हैं। इसलिए हो रही अस्पतालों पर कार्रवाई आयुष्मान भारत योजना के कड़े मानकों के अनुसार, पैनल में शामिल अस्पतालों के पास नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। यह सर्टिफिकेट अस्पताल में सुविधाओं की गुणवत्ता और मरीज की सुरक्षा की गारंटी होता है। इस सप्ताह का समय दिया है जिन अस्पतालों में एनएबीएच को लेकर जो कमियां हैं उन्हें दूर करने के लिए इस सप्ताह का समय दिया गया है। फिर भी कमियां दूर नहीं हुईं तो उन पर फैसला आगामी सप्ताह लेंगे।
-डॉ. योगेश भरसट, सीईओ, आयुष्मान योजना शासन को बात करनी चाहिए आयुष्मान योजना में एनबीएच लागू करने से पहले नर्सिंगहोम प्रतिनिधियों से बातचीत शासन को करनी चाहिए, क्योंकि अभी जिस प्रकार से नियम थोपे जा रहे हैं उनमें खामियां हैं। इसलिए नर्सिंगहोम प्रतिनिधियों से साथ बैठकर इन खामियों को दूर किया जाए।
-डॉ. राकेश रायजादा, प्रदेशाध्यक्ष, मप्र नर्सिंगहोम एसोसिएशन
