राजधानी सहित प्रदेशभर में नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू होने के बाद पहले दिन रजिस्ट्री सिस्टम ठप हो गया। वेबजीआईएस 2.0 पोर्टल मेंटेनेंस के चलते बंद रहने से कृषि भूमि के सौदे नहीं हो सके और स्लॉट भी बुक नहीं हो पाए। इसके चलते हजारों खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पोर्टल बंद होने से खसरा-खतौनी और भू-नक्शा उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कृषि जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह रुक गई है। पंजीयन मुख्यालय के अनुसार पोर्टल अपडेट का काम 1 अप्रैल से चल रहा है, जिसे अब बढ़ाकर 8 अप्रैल तक कर दिया गया है। प्रदेश में रोजाना 35 से 40 प्रतिशत रजिस्ट्रियां कृषि भूमि की होती हैं, लेकिन पोर्टल बंद रहने से ये पूरी तरह प्रभावित हैं। भोपाल में सोमवार को सिर्फ 300 दस्तावेज रजिस्टर्ड हुए, जिससे करीब 3 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। नई गाइडलाइन के तहत 740 लोकेशनों पर प्रॉपर्टी दरों में 1 से 181 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। मकानों की निर्माण लागत भी 13 हजार से बढ़ाकर 14 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। किन रजिस्ट्रियों पर असर… अपडेट के चलते खसरा नंबर आधारित कृषि जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह रुकी हुई है। अवैध कॉलोनियों के छोटे प्लॉट की रजिस्ट्री हो रही है, लेकिन बिना डायवर्सन वाली जमीन के सौदे भी अटक रहे हैं। खेतों की प्लॉटिंग से जुड़े सौदे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। डेडलाइन वाले खरीदारों को सबसे ज्यादा परेशानी पोर्टल बंद होने से उन लोगों की मुश्किल बढ़ गई है, जिनकी रजिस्ट्री की एग्रीमेंट डेडलाइन इन दिनों के बीच है। बैंक लोन अटक रहे हैं और भुगतान भी रुका हुआ है। खरीदार और विक्रेता असमंजस में हैं। गोविंदपुरा में प्रॉपर्टी दाम 36% तक बढ़े, ड्राफ्ट से ज्यादा बढ़ोतरी लागू
राजधानी में प्रॉपर्टी की नई गाइडलाइन लागू होते ही चार साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी सामने आई है। पंजीयन विभाग ने 740 लोकेशन पर 2 से 188% तक दरें बढ़ाईं। खास बात यह है कि कई जगह ड्राफ्ट रोल से ज्यादा दाम तय कर दिए गए, जिससे आम लोग आपत्ति तक दर्ज नहीं कर सके। गोविंदपुरा क्षेत्र की चार लोकेशन पर 25 से 36 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। एसबीआई चौराहा से लालघाटी रोड और रॉयल मार्केट के जूनागढ़ में भी प्रस्तावित दरों से ज्यादा कीमतें लागू हुई हैं।
पंजीयन विभाग ने 795 लोकेशन को महंगी श्रेणी में मर्ज किया है, जिससे दाम और बढ़ गए। अधिकारियों का कहना है कि सुझावों के आधार पर दरों में संशोधन किया गया है। झुग्गी क्षेत्रों में भी 25 से 56 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यहां भी रजिस्ट्री महंगी हो गई है।
