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हनुमान जयंती पर आस्था का केंद्र हैं यह मंदिर:मन्नत पूरी होने पर चढ़ते हैं चिमटे, पीपल के पेड़ और ‘वासुदेव महाराज’ की मान्यता

भोपाल के न्यू मार्केट स्थित शनि मंदिर में हनुमान जयंती पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ रही है। यहां हनुमंत लाल की विशाल मूर्ति, पीपल के पेड़ से जुड़ी अनोखी मान्यता और मन्नत पूरी होने पर चिमटे चढ़ाने की परंपरा इसे शहर के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल करती है। स्वप्न से हुई स्थापना, 30-40 साल पुराना मंदिर मंदिर के पुजारी पंडित अरुण बुचके महाराज के अनुसार, यह स्थल करीब 30 से 40 वर्ष पुराना है। इसकी शुरुआत एक आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी है, जब उन्हें स्वप्न में यहां आने का संकेत मिला। इसके बाद उन्होंने यहां सेवा शुरू की और धीरे-धीरे मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती चली गई, जिससे यह जागृत धाम के रूप में स्थापित हो गया। ‘वासुदेव महाराज’ पीपल पेड़ की अनोखी मान्यता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता ‘वासुदेव महाराज’ के नाम से प्रसिद्ध पीपल का पेड़ है। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने के बाद जब भक्त की इच्छा पूरी होती है, तो वे चिमटा चढ़ाते हैं। ये चिमटे पेड़ पर इस तरह टिके रहते हैं कि गिरते नहीं, चाहे तेज बारिश या हवा ही क्यों न हो। इसे भक्त चमत्कार के रूप में देखते हैं। एक भक्त की मन्नत से शुरू हुई परंपरा पंडित अरुण बुचके महाराज बताते हैं कि करीब 20-30 साल पहले एक भक्त को सपना आया था, जिसके बाद वह यहां मन्नत मांगने पहुंचा। उसकी इच्छा पूरी होने पर उसने चिमटा चढ़ाया। इसके बाद यह परंपरा शुरू हुई और आज हजारों की संख्या में चिमटे पेड़ पर चढ़ाए जा चुके हैं। महिलाएं पीपल के पेड़ पर सूत बांधती हैं और उसी में चिमटे स्थापित कर दिए जाते हैं। शनिवार और शनि जयंती पर उमड़ती है भीड़ मंदिर में हर शनिवार को एक से दो हजार तक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पंडित अरुण बुचके महाराज के अनुसार, शनि जयंती पर यहां विशेष आयोजन होते हैं, जिसमें हर साल करीब दो लाख अंगूठियां श्रद्धालुओं को निशुल्क वितरित की जाती हैं। हनुमान जयंती पर विशेष पूजन और भंडारा हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर में सुबह भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद करीब 11 बजे आरती और पूजन होता है। इस दौरान विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। पंडित अरुण बुचके महाराज का कहना है कि इस आयोजन के लिए किसी प्रकार का प्रचार या चंदा नहीं लिया जाता, बल्कि व्यवस्थाएं श्रद्धा और भगवान की कृपा से ही संचालित होती हैं।

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