इंदौर के भागीरथपुरा की घटना के बाद भी ग्वालियर नगर निगम प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। शहर में 28 स्थानों पर सीवर-नालों के बीच से पानी की पाइपलाइन गुजर रही हैं। इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद शासन ने जनवरी के पहले सप्ताह में सभी नगर निगमों को जलापूर्ति लाइनों की जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन दो माह बाद भी ग्वालियर में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। नगर निगम के अफसर 66 वार्डों में से सिर्फ 28 स्थानों पर ही गंदे पानी के संभावित स्रोतों की पहचान कर पाए हैं। इनमें से केवल 13 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा हुआ है, जबकि 15 स्थानों पर काम अब भी अधूरा है। शहर के कई हिस्सों में आज भी नालियों, सीवर चैंबर और नालों के आसपास से पेयजल की पाइपलाइन गुजर रही हैं। सीवरयुक्त पानी पीने पर मजबूर शहरवासी ग्वालियर शहर के कई इलाकों में गंदा और सीवरयुक्त पानी आ रहा है। ऐसे में किसी भी समय नलों में दूषित पानी मिल रहा है और लोगों को इसे पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी संबंधित विभाग के इंजीनियर मौके पर नहीं पहुंचते। शहर में आए दिन गंदे पानी की समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि निगम मुख्यालय से लेकर गली-मोहल्लों तक लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। कई लोगों ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, फिर भी समाधान नहीं हुआ। पानी में निकलते हैं कीड़े, बच्चे पड़ रहे बीमार शहर के वार्ड-12 में स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नल आते हैं तो ऐसा लगता है मानो नालों का पानी छोड़ दिया गया हो। कई बार सीवर का पानी भी आ जाता है। इससे पानी पीने में तो समस्या होती ही है, साथ ही अन्य परेशानियां भी बढ़ रही हैं। स्थानीय लोग बीमार पड़ रहे हैं। प्रशासन कब सुनेगा?, क्या इंदौर के भागीरथपुरा जैसा हादसा होने के बाद? इन वार्डों में है गंदे पानी की परेशानी मिनट-टू-मिनट अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
