राजधानी में सैटेलाइट इमेज के आधार पर कॉलोनियों का विस्तार दिखाकर प्रॉपर्टी गाइडलाइन बढ़ाने की तैयारी की है। पंजीयन विभाग ने जिला मूल्यांकन समिति में प्रेजेंटेशन देकर बताया कि कोलार, मेंडोरा, रातीबड़ और नीलबड़ जैसे क्षेत्रों में पिछले 9 वर्षों में तेजी से विकास हुआ है। इसी आधार पर इन क्षेत्रों में 5 से 50% तक वृद्धि प्रस्तावित है। नई गाइडलाइन के तहत जिले की 2882 लोकेशन को घटाकर 2175 किया गया है। 732 लोकेशन पर 5 से 181% तक रेट बढ़ाने की तैयारी है। इससे 50% तक लोकेशन पर प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। प्रेजेंटेशन में 2017 और वर्तमान की सैटेलाइट इमेज के जरिए विस्तार दिखाया गया, लेकिन उस समय के रेट शामिल नहीं किए गए। उधर, विशेषज्ञों का कहना है 60% रजिस्ट्री तो अवैध कॉलोनी की हुई हैं। यहां न सीवेज न सड़क की सुविधा है। बिना सुविधाओं का मूल्यांकन किए सिर्फ रजिस्ट्री के आधार पर रेट बढ़ाना ठीक नहीं है। सड़क, पानी- सीवेज जैसी सुविधाएं देखना जरूरी क्रेडाई और रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सैटेलाइट इमेज के आधार पर रेट तय करना उचित नहीं है। सीवेज, पीने का पानी, सड़क, खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं का आकलन जरूरी है। जहां आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं, वहां कीमतें बढ़ाना ठीक नहीं है। नरेला और गोविंदपुरा के वार्डों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नए गाइडलाइन ड्राफ्ट में 85 वार्डों की 603 लोकेशन पर बढ़ोतरी प्रस्तावित है। नरेला में 138 लोकेशन पर 5 से 166%, गोविंदपुरा में 153 पर 5 से 181%, हुजूर में 108 लोकेशन, मध्य में 81, उत्तर में 153 और दक्षिण-पश्चिम में 17 लोकेशन पर 100% तक वृद्धि प्रस्तावित है। गाइडलाइन का आधार कलेक्टर गाइडलाइन बनाने में एआई का इस्तेमाल हुआ
कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए एआई का सहारा लिया जा रहा है। इसमें सैटेलाइट इमेज से लेकर सभी 50 विभागों के डेटा का सेकंड में आंकलन संभव हुआ है। पहली बार नेचुरल बाउंड्री को आधार बनाकर गाइड लाइन बना रहे हैं। इससे ज्यादा पारदर्शिता आएगी।’- स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक भोपाल
