इंदौर के हर वार्ड में क्या सच में विकास हो रहा है, और जनता उसे कैसे देखती है? इसी का जवाब तलाशने के लिए दैनिक भास्कर ने खास सीरीज ‘वार्ड टॉक’ शुरू की है। इस सीरीज में हम हर वार्ड के पार्षद के दावों के साथ जनता की राय, अधूरे काम और आगे की जरूरतों को सामने रखेंगे। आज एपिसोड में हम पहुंचे हैं वार्ड 11, जहां से पार्षद हैं कमल वाघेला। क्या काम पूरे हुए, क्या बाकी हैं, और जनता 10 में से कितने नंबर देती है- आज का पार्षद में देखिए काम का पूरा हिसाब… सवाल: आपके वार्ड का काम कौन सा अधूरा है और क्यों?
जवाब: जैसा कि सभी को जानकारी है, भागीरथपुरा का मामला लंबे समय से पानी से जुड़ा हुआ है। यहां पानी का विषय लगातार बना हुआ था। जब मैं पार्षद बना, उसी समय कुछ ऐसे अनुभव सामने आए कि यहां डाली गई लाइनें सड़ी-गली, जंग लगी और टूटी हुई थीं। कहीं-न-कहीं ड्रेनेज और नर्मदा लाइन आपस में मिक्स हो रही थी। इसकी लिखित जानकारी मैंने जहां-जहां संभव हो सका, वहां दी। उसी के परिणामस्वरूप प्रस्ताव पास हुए, टेंडर हुए और लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में पिछले वर्षों में नर्मदा की लाइन बदल दी गई। वर्तमान में जो मुख्य सप्लाई लाइन है, उसे भी शत-प्रतिशत बदल दिया है। सवाल: आपके वार्ड में जनता की सबसे आम शिकायत कौन सी आती है?
जवाब: पहले भी कहा था कि वार्ड का इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्रेनेज, नर्मदा लाइन, चेंबर, सड़क और पानी को लेकर पहले बहुत शिकायतें थीं। साथ ही सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें थीं। उस दिशा में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मुझे लगता है कि आगामी एक वर्ष में हम इन सभी समस्याओं का समाधान कर एक अच्छा वार्ड बनाने में सफल होंगे। सवाल: आपके वार्ड में ऐसा कौन सा ऐसा प्रयोग है, जो आपने किया हो और उससे कुछ बदलाव देखने को मिला हो?
जवाब: मूल समस्याओं के आसपास ही हमने काम किया है। खासकर स्वच्छता को लेकर एक समय ऐसा था जब हमारे क्षेत्र की बैकलाइन भरी रहती थी और चारों ओर गंदगी का साम्राज्य था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के सहयोग और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्देशन में हमने यहां स्वच्छता अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप गंदगी में काफी कमी आई। चूंकि यहां लगभग 50 हजार की आबादी है और किरायेदारों की संख्या भी अधिक है, इसलिए कहीं-कहीं थोड़ी गंदगी दिखाई देती है। इसके बावजूद स्वच्छता को लेकर हमने लगातार प्रयास किए हैं और एक बार हमारे वार्ड को स्वच्छता में नंबर-वन का अवॉर्ड भी मिल चुका है। सवाल: किन इलाकों में काम नहीं हो पाया है?
जवाब: ऐसा कोई विशेष क्षेत्र नहीं है, जहां काम नहीं हुआ हो। हालांकि, अभी भी हमारे वार्ड के सीमावर्ती क्षेत्र, विशेषकर नदी के किनारे स्थित इलाकों में काम करने की आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य रहेगा कि आगामी एक वर्ष में सभी आवश्यक सुविधाएँ वहां तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए। यहां आबादी घनी है और गलियां भी छोटी हैं, जिससे काम करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन इसके बावजूद हम पूरी कोशिश करेंगे और वार्ड के विकास को आगे बढ़ाएंगे।
सवाल: पानी को लेकर अभी भी शिकायतें आ रही है क्या?
जवाब: निश्चित रूप से यहां लगभग 50 हजार की आबादी है। अभी एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन नियमित जलापूर्ति 50 प्रतिशत क्षेत्रों में अब भी नहीं हो पा रही है। आगामी 8 से 15 दिनों में जब उन इलाकों तक पानी पहुंचने लगेगा, तब स्थिति में सुधार आएगा। यहां गलियां संकरी हैं, जहां टैंकर नहीं जा पाते, इसलिए कुछ कठिनाइयां हैं। इसके बावजूद आगामी 10 से 15 दिनों में इन समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा।
