रतलाम मंडल इंदौर रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए शहर की लाइफलाइन शास्त्री ब्रिज को नए स्वरूप में बनाने को तैयार है, प्रस्ताव भी भेजा चुका है। लेकिन इस मामले में दो उलझने आ गई हैं। जनप्रतिनिधि इस ब्रिज को सिक्सलेन बनवाने के प्रयास में है, जबकि रेलवे खुद के खर्च पर फोरलेन से अधिक का ब्रिज नहीं बना सकता। इंदौर नगर निगम ब्रिज निर्माण सहित अन्य यूटिलिटी का जिम्मा उठाने को तैयार नहीं है। भविष्य में यहां मेट्रो स्टेशन भी आना है। ऐसे में प्रोजेक्ट की प्लानिंग दोनों एजेंसी को मिलकर करनी होगी। डीआरएम बोले- मेट्रो और रेलवे स्टेशन के बीच कनेक्टिविटी होगी रेलवे ने जो प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए भेजा है, उसमें यहां बनने वाले मेट्रो स्टेशन से कनेक्टिविटी का बिंदु भी है। रतलाम मंडल डीआरएम अश्वनी कुमार ने बताया, फाइनल डीपीआर बनाते समय ध्यान रखा जाएगा कि मेट्रो स्टेशन निर्माण में दिक्कत न हो। ऊंचाई बढ़ने पर एमजी रोड, रीगल की ओर भुजाएं बढ़ेंगी। निगम ने ही बनाया था माणिकबाग आरओबी शास्त्री ब्रिज मामले में निगम भले ही राशि खर्च नहीं करना चाहता, लेकिन 2002–2003 में निगम ने माणिकबाग ब्रिज का पूरा खर्च वहन किया था। दूसरी ओर रेल मंत्रालय ने कॉस्ट शेयरिंग के आधार पर नियम तय किए है। इसमें रेलवे टूलेन व फोरलेन ब्रिज ही बना सकता है, सिक्सलेन नहीं। महापौर ने कहा- यूटिलिटी भी पूरी दें शास्त्री ब्रिज को लेकर रेल और निगम अफसरों के बीच दो से तीन बैठकें भी हो चुकी हैं। निगम चाहता है कि रेलवे पहले टू–लेन ब्रिज बनाए, इसके बाद मौजूदा ब्रिज को तोड़कर टू–लेन ब्रिज बनाए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, जब रेलवे खुद की ड्राइंग डिजाइन के साथ ब्रिज बना रहा है तो यूटिलिटी भी पूरी करके दे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा- फोन लेन के बजाय सिक्स लेन बनाना चाहिए।
