मप्र में रेत खदानों के ठेके बीच में छोड़कर बाद में कम कीमत पर दोबारा हासिल करने वाले ठेकेदारों पर अब सख्ती की जाएगी। राज्य सरकार ने रेत नीति में संशोधन कर ऐसे मामलों में ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान किया है। तय अवधि से पहले नियम-विरुद्ध ठेका छोड़ने पर ठेकेदार अगले तीन साल तक किसी भी रेत खदान की नीलामी में हिस्सा नहीं ले सकेगा। यह फैसला शहडोल और कटनी की रेत खदानों से जुड़े मामलों के बाद लिया गया है, जहां ठेकेदारों ने ऊंची बोली पर ठेका लेकर बीच में छोड़ दिया था और बाद में कम कीमत पर फिर हासिल कर लिया। इन मामलों में स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन ने टेंडर रद्द कर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के एमडी फ्रैंक नोबल ए के मुताबिक, रेत के ठेके 3 साल के लिए होते हैं। तय अवधि से पहले नियम विरुद्ध ठेका छोड़ने पर अब ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई होगी। इसके लिए नीति में संशोधन कर दिया गया है। यह था मामला साल 2024 में लगभग एक ही समय पर सहकार ग्लोबल ने शहडोल में 68 करोड़ और धनलक्ष्मी समूह ने कटनी में 64 करोड़ रुपए में रेत खदानों के ठेके हासिल किए थे। सवा साल तक ठेका चलाने के बाद दोनों समूहों ने खदानें छोड़ दीं। इसके बाद सितंबर 2025 में हुई दोबारा नीलामी में इन्हीं कंपनियों ने कम कीमत पर फिर से ठेके हासिल कर लिए—शहडोल में 48 करोड़ और कटनी में 54 करोड़ रुपए में। मामला स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के संचालक मंडल तक पहुंचने पर दोनों टेंडर रद्द कर दिए गए हैं और अब दोबारा नीलामी प्रक्रिया की जाएगी। आरटीआई और पर्यावरण कार्यकर्ता प्रभात पांडे की शिकायतों के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। नई व्यवस्था: शहडोल-कटनी की खदानों के मामलों के बाद फैसला
