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7 साल पाकिस्तानी जेल में काटकर बालाघाट लौट रहा प्रसन्नजीत:दिल्ली घूमने गया था, फिर लापता हुआ; बोला- पाक कैसे पहुंचा, याद नहीं

पाकिस्तान की जेल से सात साल बाद रिहा हुए प्रसन्नजीत रंगारी शुक्रवार रात बालाघाट के कटंगी पहुंचेंगे। प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोब्रागड़े, मैहकेपार रोजगार सहायक योगेंद्र चौधरी, मोहगांव रोजगार सहायक आशीष वासिनी और कॉन्स्टेबल लक्ष्मीप्रसाद बघेल, उन्हें लेने बालाघाट से अमृतसर गए थे। वहां से सभी लोग कार से गुरुवार रात बालाघाट के लिए निकले हैं। इससे पहले उन्होंने गोल्डन टेम्पल में दर्शन किए। प्रसन्नजीत ने अमृतसर में सबसे पहले अपने जीजा को पहचाना। कहा- जीजाजी नमस्ते, मैं आपको जानता हूं। प्रसन्नजीत को 31 जनवरी को पाकिस्तान की जेल से रिहा किया गया था। परिवार को उन्हें घर लाने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद कलेक्टर मृणाल मीणा ने इंतजाम किए। ट्रेन के टिकट करवाकर परिवार के साथ प्रशासनिक कर्मचारियों को अमृतसर भेजा। बालाघाट पहुंचने से पहले रास्ते में दैनिक भास्कर ने प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोब्रागड़े और रोजगार सहायक योगेंद्र चौधरी से फोन पर बात की।
बहन और गांव का नाम बताया
रोजगार सहायक योगेंद्र चौधरी ने बताया कि रात 8 बजे तक बालाघाट के कटंगी पहुंचेंगे। यहां से प्रसन्नजीत को जीजा के गांव मैहकेपार ले जाया जाएगा। चौधरी ने कहा- हम 4 फरवरी की रात करीब 10:30 बजे अमृतसर पहुंचे थे। यहां रेडक्रॉस मजीठिया रोड थाने में औपचारिकताएं पूरी करवाईं। इसके बाद पुलिस ने प्रसन्नजीत को हमें सौंप दिया। सुबह गोल्डन टेम्पल के दर्शन किए। इसके बाद गुरुवार सुबह करीब 10 बजे कार से बालाघाट के लिए चल दिए। थाने में राजेश ने प्रसन्नजीत से पूछा- मुझे पहचानते हो? इस पर उसने हां में जवाब दिया। कहा- नमस्ते जीजाजी। इसके बाद अपनी बहन संघमित्रा का नाम बताया। पूछा कि कहां के रहने वाले हो तो प्रसन्नजीत ने कहा- कैलांजी गांव का रहने वाला हूं। अक्टूबर 2019 में पाकिस्तानी जेल पहुंचा था
योगेंद्र चौधरी ने कहा- प्रसन्नजीत से पूछा गया कि वह पाकिस्तान कैसे पहुंचा। उसने कहा कि वह 2017 में दिल्ली घूमने गया था। इसी दौरान मानसिक स्थिति खराब हो गई थी। 2019 में लाहौर की पाकिस्तान जेल में था। लेकिन वहां कैसे पहुंचा, इस बारे में प्रसन्नजीत कुछ नहीं बता पा रहा है। पाकिस्तान में दर्ज एफआईआर में लिखा है कि अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को बिना वीजा और पासपोर्ट के पकड़ा गया था। इसके बाद उसे लाहौर जेल भेज दिया गया था। दिसंबर 2021 में पाकिस्तान में होने का पता चला
प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोब्रागड़े ने कहा- वे 2017 में घर से लापता हो गए थे। कुछ समय बिहार रहे, फिर लौट आए लेकिन बाद में दोबारा गायब हो गए। परिजन ने काफी तलाश की। कोई सुराग नहीं मिला तो उन्हें मृत मान लिया गया था। दिसंबर 2021 में अचानक आए फोन से परिवार को पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। उनकी बहन संघमित्रा लगातार उनकी घर वापसी के लिए संघर्ष कर रही थीं। 1 फरवरी को मिली जेल से रिहा होने की जानकारी
1 फरवरी 2022 को खैरलांजी थाना पुलिस से फोन आने पर परिवार को प्रसन्नजीत की रिहाई की जानकारी मिली। इसके बाद अमृतसर थाने से आए कॉल पर संघमित्रा ने करीब 5 साल बाद अपने भाई से बात की, उसकी आवाज सुनी। प्रसन्नजीत के लापता होने के बाद उनके पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो चुका है। बहन संघमित्रा राजेश खोब्रागड़े, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विक्रम देशमुख और कलेक्टर मृणाल मीणा के संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रसन्नजीत पाकिस्तान से रिहा होकर अब घर लौट रहे हैं। मामले से जुड़ीं ये खबरें भी पढ़ें… 7 साल बाद पाकिस्तान से घर वापसी, प्रसन्नजीत छोड़े गए भारतीय कैदियों में शामिल
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए हैं। 31 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए सात भारतीय कैदियों में उनका नाम भी शामिल है। वर्षों से उनकी वतन वापसी के लिए संघर्ष कर रहीं बहन संघमित्रा के प्रयास आखिरकार रंग ले आए। पढ़ें पूरी खबर… बहन हर साल करती है भाई के लौटने का इंतजार प्रिय भाई, मैं रक्षाबंधन पर तुझे बहुत याद करती हूं। मैं राखी बांधना चाहती हूं, लेकिन तू मुझसे बहुत दूर है। चिट्ठी में लिखी इस इबारत को पढ़ने के बाद संघमित्रा भाई की याद में रोने लगती है। वह पिछले 4 साल से अपने भाई को वापस भारत लाने की कोशिशें कर रही है। भारत सरकार को कई बार चिट्ठी लिख चुकी है लेकिन अभी तक उसे कोई कामयाबी नहीं मिली है। पढ़ें पूरी खबर…

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