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देश भर के लिए रोल मॉडल बना-टेबल टॉप मार्किंग:अन्य राज्यों में नजर आएगी लाल सड़क,तमिलनाडु-पंजाब-पश्चिम बंगाल को भाई MP की स्कीम

मध्य प्रदेश के नौरादेही में बनी रेड रोड ‘टेबल टॉप मार्किंग’ देश भर के लिए रोड माडल बन रही है। जंगली जानवर और एक्सीडेंट को कम करने के लिए करीब दो किलोमीटर तक बनी रेड रोड जल्द ही देश के कई और राज्यों में भी नजर आएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अन्य प्रदेशों के अधिकारी इस रोड के लिए संपर्क कर रही है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु,पंजाब और चैन्नई सहित कई अन्य राज्यों के अधिकारी जल्द ही नौरादेही में बनी रोड का निरीक्षण करने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि टेबल टाप मार्किंग रोड बनने के बाद ना सिर्फ दुर्घटनाओं में पूरी तरह से कमी आई है, बल्कि जंगली जानवरों की मौत भी नहीं हुई है। देश का पहला रेड रोड
नौरादेही में अक्टूबर 2025 को ‘टेबल टाॅप मार्किंग’ रेड रोड को तैयार किया गया था। जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नौरादेही अभयारण्य के 12 किलोमीटर लंबे डेंजर जोन को सुरक्षित बनाने के लिए हाईवे में विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जो देश में पहली बार इस तरह की रोड बनाई गई है। दरअसल इस इलाके में सैकड़ों हिरन, नीलगाय और अन्य वन्य जीव विचरण करते हैं। जहां पहले टू लेन सड़क पर तेज रफ्तार वाहन अक्सर जानवरों से टकरा जाते थे। कई बार सड़क दुर्घटनाएं भी होती थीं। इसी खतरे को देखते हुए NHAI ने अब फोर लेन निर्माण के साथ तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। एनएचएआई ने 12 किलोमीटर लंबे जंगली इलाके में से दो किलोमीटर के संवेदनशील हिस्से में सड़क की सतह पर 5 एमएम मोटी रेड कलर मार्किंग की है, जिसे ‘टेबल टॉप मार्किंग’ नाम दिया गया है। इस लेयर की वजह से वाहन गुजरते समय हल्के झटके महसूस होते हैं, जो चालक को गति नियंत्रित रखने के लिए सचेत करते हैं। बता दें कि लाल रंग पहले से ही खतरे का संकेत माना जाता है। ऐसे में ड्राइवर मनोवैज्ञानिक रूप से भी लाल रंग को देखते ही गाड़ी की रफ्तार अपने आप कम कर लेता है। अन्य एजेंसियों को भा रहा है प्रयोग
अक्टूबर 2025 में जैसे ही रेड रोड बनकर तैयार हुई तो इसे एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने नाम दिया टेबल टाप मर्किंग। सोशल मीडिया में कुछ ही दिनों के भीतर यह रोड इस तरह से वायरल हुई कि देश भर की नजरें इस पर आकर थम गईं। 2021 में काम शुरू, 2025 में पूरा हुआ
टेबल टॉप मार्किंग के लिए सड़क के दोनों और वाइट कलर की पैवर शोल्डर लाइन 5 एमएम मोटाई के साथ बनाई गई है। वाहन चालक को अगर गाड़ी चलाते समय नींद आ जाए या वाहन किनारे की ओर खिसकने लगे तो झटके के कारण चालक तुरंत सतर्क हो जाता है। NHAI का मानना है कि भविष्य में इस मार्ग को ब्लैक स्पॉट बनने से रोकने में यह स्कीम बहुत कारगार साबित होगी। वाइल्डलाइफ विभाग से 12 किमी फोर लेन निर्माण की अनुमति 2020 में मिली थी। 2021 में काम शुरू हुआ और 2025 तक परियोजना पूरी हो गई। उन्होंने बताया कि टू लेन को फोर लेन में बदलने पर वाहन गति स्वतः बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटनाएं भी बढ़ने की आशंका रहती है। 2 किलोमीटर में बिछाया रेड कार्पेट
तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने को लेकर अक्सर नौरादेही के जंगल भरे रास्तों में वाहन से टकराकर जंगली जानवरों की मौत हो जाती थी, इतना ही नहीं एक्सीडेंट भी यहां पर बड़ी संख्या में होते थे, इसको लेकर एनएचएआई ने रोड को डिजाइन करते समय तय किया कि सबसे खतरनाक 2 किमी हिस्से में रेड मार्किंग और मोटी लेयर बिछाई जाएगी। वन्य जीवों की आवाजाही को देखते हुए रोड के नीचे से 25 अंडरपास भी बनाए गए हैं, ताकि जानवर सड़क पर आए बिना सुरक्षित तरीके से इस पार से उस पार चले जाए। केंद्रीय मंत्री गडकरी कर चुके हैं तारीफ केंद्रीय सड़क एवं परिवहन व राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के एनएच-45 नौरादेही का एक वीडियो एक्स पर शेयर किया है। गडकरी ने इसे देश का पहला ‘वाइल्ड लाइफ सेफ’ हाईवे बताया है। वीडियो में उन्होंने बताया कि विकास और पर्यावरण संतुलन व वन्य जीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘रेट टेबल टॉप मॉर्किग’ का पहली दफा प्रयोग किया गया है।
नितिन गडकरी का कहना है कि सड़कों के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों व वन्य प्राणियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर नवाचार प्रयास किए जा रहे हैं। MP के नौरादेही से गुजरे एनएच 45 भोपाल-जबलपुर मार्ग पर करीब 12 किलोमीटर लंबे 2 एवं 4 लेन मार्ग का निर्माण किया गया है।
वन्य प्राणियों को ध्यान में रखकर विशेष डिजाइन की गई है। इसमें दो किलोमीटर लंबे संवेदनशील घाटी क्षेत्र में 5 MM मोटी टेबल टॉप मार्किंग का प्रयोग किया गया है। यह देश में पहली दफा किया गया प्रयोग है, जो सफल साबित हो रहा है। एक नजर में परियोजना ये खबर भी पढ़ें… नौरादेही अभयारण्य में NHAI का अनोखा प्रयोग जंगल क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों और वन्य जीवों की मौत को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक अनूठी तकनीक अपनाई है। जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नौरादेही अभयारण्य के 12 किलोमीटर लंबे डेंजर जोन को सुरक्षित बनाने के लिए हाईवे को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।पूरी खबर पढ़ें

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