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मावा-घी असली या मिलावटी, कैसे पहचानें?:दिवाली से पहले 35 टन खाद्य सामग्री जब्त; घर में ही करें जांच, आपकी मिठाई कितने दिन सुरक्षित?

देवास में गुरुवार को 550 किलो एनालॉग मावे से बनी मिठाई जब्त की गई। इससे पहले सीहोर के श्यामपुर में 42 क्विंटल मावा, मुरैना में 1,740 किलो मिल्क केक और 120 किलो मावा पकड़ा गया। मुरैना की खेप की शुरुआती जांच में स्टार्च और न्यूट्रलाइजर के संकेत मिले हैं। 1 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चले अभियान में प्रदेशभर से 35 टन संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त की गई। इसकी कीमत करीब 1.32 करोड़ रुपए बताई गई है। त्योहार पर मिठाई और दूध से बनी चीजों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। दिवाली 8 नवंबर को है। ऐसे में मावा, घी, दूध और मिठाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? घर पर मिलावट के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें? मिलावटी चीजें खाने से सेहत पर क्या असर पड़ सकता है? मिठाई कितने दिन तक सुरक्षित रहती है और मिलावट मिलने पर शिकायत कहां करें? समझते हैं मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: दिवाली पर खोवा, घी, दूध और मिठाई खरीदते समय क्या-क्या देखना चाहिए? जवाब- पहले मिलावटी माल का रास्ता समझिए। दुकान पर ये तीन चीजें देखें… FSSAI लाइसेंस नंबर: दुकान पर लगा होना चाहिए। ‘बेस्ट बिफोर’ तारीख: FSSAI ने 1 अक्टूबर 2020 से खुली मिठाई की ट्रे पर यह तारीख लिखना अनिवार्य किया है। पक्का बिल: शिकायत में यही सबसे बड़ा सबूत होगा। पैकेट पर नाम होना भी गारंटी नहीं: अगस्त 2026 के अभियान में प्रदेश के 2,234 नमूनों में से 73 फेल हुए, यानी करीब हर 30 में से एक। भोपाल के 13 और इंदौर के 8 घी के नमूने असुरक्षित निकले। इस अभियान में भी शिवपुरी में एक ब्रांड के घी में सीसा (लेड) मिलने पर उसके बैच की बिक्री रोकी गई, और नर्मदापुरम में छह ब्रांड के बैच पर रोक लगी। इसलिए पैक्ड घी के लेबल पर बैच नंबर जरूर देखें, क्योंकि रोक इसी नंबर पर लगती है। सवाल 2: क्या घर पर ही पता लगा सकते हैं कि खोवा, घी या दूध मिलावटी है? जवाब- हां, कुछ हद तक। FSSAI ने ऐसे आसान तरीके बताए हैं, जिनमें सिर्फ पानी और मेडिकल स्टोर पर मिलने वाला आयोडीन का घोल (टिंचर आयोडीन) लगता है। ये जांच इस सीजन में क्यों खास है: मुरैना और रीवा की खेपों की शुरुआती जांच में स्टार्च की मिलावट सामने आई थी, यानी खोवे का वजन बढ़ाने के लिए आटा या आलू मिलाना। आयोडीन वाली जांच ठीक यही पकड़ती है, इसलिए खोवा या पनीर लाएं, तो यह दो मिनट की जांच कर लें। पूरा भरोसा न करें: मुरैना में इस अभियान में 3,000 किलो सोर्बिटोल पकड़ा गया, और ग्वालियर में पनीर के साथ पाम ऑयल मिला। ऐसी मिलावट रंग या झाग से नहीं पकड़ी जाती। घर की जांच में गड़बड़ी न दिखे, तो इसका मतलब यह नहीं कि सामान पूरी तरह शुद्ध है। शक हो, तो सामान बिल के साथ संभालकर रखें। सवाल 3: मिलावटी मिठाई या दूध से बनी चीजें खाने पर शरीर को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- हर मिलावट एक जैसी खतरनाक नहीं होती। स्टार्च: यह सीधे जहर नहीं है, लेकिन आप दूध के दाम पर आटा या आलू खा रहे होते हैं, और मिठाई का पोषण भी घट जाता है। बासी मावा: दूध से बनी चीजों में बैक्टीरिया सबसे तेजी से पनपते हैं। कई दिन सफर करके आया खोवा ठंडे में न रखा गया हो, तो उससे बनी मिठाई उल्टी, दस्त और पेट में मरोड़ की वजह बन सकती है। डिटर्जेंट या यूरिया: दूध में मिलाए जाते हैं। FSSAI इन्हें पेट की गड़बड़ियों से जोड़ता है। सोर्बिटोल: मिठास बढ़ाने वाला यह पदार्थ ज्यादा मात्रा में दस्त और पेट फूलने की वजह बनता है। पाम ऑयल और वनस्पति: घी में मिलाए जाते हैं, और इनकी ज्यादा मात्रा दिल के लिए ठीक नहीं मानी जाती। सीसा (लेड): सबसे गंभीर खतरा यही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक लेड दिमाग, किडनी और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, और बच्चों पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है। मिठाई खाने के बाद बार-बार उल्टी-दस्त हों या शरीर में पानी की कमी लगे, तो डॉक्टर के पास जाने में देर न करें। बच्चों और बुजुर्गों में यह जल्दी गंभीर हो सकता है। सवाल 4: मिठाई, खोवा और दूध से बनी चीजें कितने समय तक सुरक्षित रहती हैं? जवाब- जितना ज्यादा दूध और नमी, उतनी जल्दी खराबी। सबसे बड़ी चूक: ये दिन बनने की तारीख से गिने जाते हैं, खरीदने की तारीख से नहीं। दिवाली पर दुकानदार कई दिन पहले से मिठाई बनाकर रख लेते हैं। चार दिन चलने वाली खोवा बर्फी अगर दो दिन पहले बनी थी, तो घर लाने के बाद आपके पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। तोहफे में देने वाली मिठाई: डिब्बे बांटने हैं तो बेसन-आटे के लड्डू, सोहन हलवा या ड्राई फ्रूट वाली मिठाई बेहतर है। डिब्बा खुलने तक अकसर एक-दो दिन निकल जाते हैं। कच्चा खोवा: घर में मिठाई बनाने के लिए खोवा खरीदा है तो उसी दिन या अगले दिन इस्तेमाल कर लें, तब तक फ्रिज में रखें। यह तैयार मिठाई से भी जल्दी खराब होता है। सवाल 5: अगर दुकानदार ने मिलावटी सामान बेच दिया तो शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- पहले सबूत संभालिए: बिल, बचा हुआ सामान और उसके फोटो। फिर तीन रास्ते हैं। 1. खाद्य सुरक्षा विभाग से शिकायत: FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप पर, टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 पर, जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को लिखित में या सीएम हेल्पलाइन 181 पर। 2. खुद जांच कराएं: खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 40 के तहत ग्राहक तय फीस देकर खरीदा सामान सरकारी खाद्य विश्लेषक से जंचवा सकता है। शर्त यह है कि खरीदते वक्त ही दुकानदार को बताना होगा कि आप इसकी जांच कराएंगे। 3. पैसे वापसी और हर्जाना: जिला उपभोक्ता आयोग में ‘ई-जागृति’ पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें। सजा कितनी: लैब में सामान ‘असुरक्षित’ साबित होने पर धारा 59 के तहत कार्रवाई होती है। किसी को नुकसान न हुआ हो, तो 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। मौत होने पर कम से कम 7 साल से उम्रकैद तक की सजा और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना है। धारा 65 के तहत पीड़ित परिवार को मौत पर कम से कम 5 लाख रुपए का मुआवजा भी मिल सकता है। इस सीजन में जब्त ज्यादातर सामान के नमूने अभी लैब में हैं। रिपोर्ट आने पर ही तय होगा कि कौन-सी खेप सच में मिलावटी थी, तब तक बचाव आपके हाथ में है: लाइसेंस वाली दुकान, ट्रे पर लिखी तारीख, कीमत का गणित और जरूरत भर की खरीदारी। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… धनतेरस पर नई गाड़ी लेने से पहले क्या जांचें: PDI क्या होता है और यह जरूरी क्यों, VIP नंबर कैसे मिलेगा? धनतेरस पर नई गाड़ी खरीदने की तैयारी है, तो सिर्फ पसंदीदा मॉडल और रंग चुनना काफी नहीं है। शोरूम में गाड़ी की चाबी मिलने से पहले एक जरूरी जांच करनी होती है, जिसे PDI कहते हैं। इसमें जरा-सी चूक बाद में परेशानी बन सकती है…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।

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