उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गिद्धों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2021 में यहां 172 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जबकि 2026 की गणना में इनकी संख्या बढ़कर 388 हो गई है। इस बार रिजर्व में गिद्धों की सात प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें स्थानीय और प्रवासी दोनों तरह के गिद्ध शामिल हैं। 2021 में 172 थे, 2024 में बढ़कर 300 हुए गणना के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 की शुरुआत में रिजर्व में 159 बड़े और 13 छोटे गिद्ध मिले थे। वर्ष 2024 में इनकी कुल संख्या बढ़कर 300 हो गई। वहीं, 24 मई 2026 को हुई गणना में 358 बड़े और 30 छोटे गिद्ध दर्ज किए गए। इस तरह पांच साल में इनकी संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है। गिद्धों का सुरक्षित प्राकृतिक आवास बन रहा बांधवगढ़ क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने गुरुवार को आंकड़े जारी करते हुए बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गिद्धों की संख्या दोगुनी होना वन्यजीव संरक्षण की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब बांधवगढ़ की पहचान सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि गिद्धों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में भी मजबूत हो रही है। गिद्धों के संरक्षण और उनकी संख्या पर नजर रखने के लिए टीम लगातार निगरानी कर रही है। सात प्रजातियों की हुई पहचान ग्रीष्म और शरद ऋतु में हुई गणना के साथ पक्षी विशेषज्ञों के भ्रमण में गिद्धों की सात प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें इंडियन वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, रेड हेडेड वल्चर, व्हाइट रंप्ड वल्चर, सिनेरियस वल्चर, हिमालयन ग्रिफन और यूरेशियन ग्रिफन शामिल हैं। कुछ प्रजातियां पूरे साल यहां रहती हैं, जबकि हिमालयन ग्रिफन और यूरेशियन ग्रिफन सर्दियों में प्रवास करके पहुंचते हैं। तस्वीरे देखिए… चट्टानें घोंसले बनाने के लिए अनुकूल बांधवगढ़ की ऊंची और खड़ी चट्टानें गिद्धों के घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए अनुकूल जगह उपलब्ध कराती हैं। जंगल की गहरी घाटियों से उठने वाली गर्म हवाएं इन पक्षियों को लंबे समय तक उड़ने में मदद करती हैं। गिद्ध जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मृत जीवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
