2600 करोड़ रुपए की लागत से बने उज्जैन-गरोठ हाईवे के निर्माण में एनएचएआई अफसरों और जीएचवी कंपनी की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही देवास रोड से लगे 500 मीटर हिस्से को तोड़ने की नौबत आ गई है। आगर रोड के ऊपर से गुजरे हिस्से की पैनल तिरछी होकर गिरने की स्थिति में पहुंचने पर जिम्मेदारों ने हाईवे में ही 13-14 सरिये (कीलें) ठोक दिए। एनएचएआई इसे ‘सॉइल नेलिंग’ तकनीक बता रहा है। वहीं, कालियादेह पैलेस ब्रिज के पास हाईवे का एक हिस्सा धंसने पर ब्लॉक बिखर गए, जिसे छिपाने के लिए 25 फीट लंबा नया सीमेंट-कॉन्क्रीट ब्लॉक बनाकर टेका लगाया गया है। एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवम शर्मा के मुताबिक सॉइल नेलिंग संरचना को मजबूती देने की मानक इंजीनियरिंग तकनीक है।
