बैतूल में पत्नी की कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने वाले पति को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में 13 साल की बेटी चश्मदीद थी। उसने पुलिस को बताया था कि पिता ने मां की हत्या की है। लेकिन बाद में वह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गई। इसके बावजूद आरोपी नहीं बच सका। पुलिस ने घटनास्थल से मिले खून और आरोपी के कपड़ों पर लगे धब्बों की DNA जांच कराई थी। रिपोर्ट में नमूनों का मिलान हुआ। कोर्ट ने इन वैज्ञानिक साक्ष्यों को अहम माना और आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसला 29 अक्टूबर को जिला न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल की कोर्ट ने सुनाया। वारदात 3 अगस्त 2025 की रात करीब 2 बजे हुई थी। मामले को समझने के लिए दैनिक भास्कर ने लोक अभियोजक नितिन मिश्रा से बात की। रात में हत्या, खेत के मकान में मिला शव
3 अगस्त 2025, रात करीब 2 बजे। बैतूल के ग्राम चिखली के पटवारी ढाना में खेत पर बने मकान में सुम्मी (45) का खून से लथपथ शव मिला था। महिला के सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे। सूचना पर सुबह पुलिस पहुंची। शव का पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट में सामने आया कि कुल्हाड़ी से वार कर हत्या की गई थी। जांच आगे बढ़ी तो महिला के पति सुखराम सेल्यूलर पर आरोप लगा। पूछताछ में लोगों ने बताया कि पति-पत्नी के बीच आए दिन झगड़ा होता था। वारदात वाली रात भी दोनों के बीच खाना बनाने की बात पर विवाद हुआ था। इसके बाद गुस्से में पति ने पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या की। बेटी ने बताया–पिता ने की हत्या, कोर्ट में पलटी
मामले में सबसे अहम पहलू सुखराम की 13 साल की बेटी के बयान रहे। अभियोजन के मुताबिक वारदात के समय घर में पति-पत्नी के साथ उनकी बेटी भी मौजूद थी। पुलिस ने जब बच्ची के बयान दर्ज किए। उसने बताया था कि पिता ने कुल्हाड़ी से काटकर मां को मार डाला। वह भी बहुत डर गई थी। पुलिस ने कोर्ट में भी बयान दर्ज करवाए, जिनमें पिता को हत्या करते देखने की बात दोहराई थी। हालांकि, बाद में जब बच्ची के दोबारा कोर्ट में बयान हुए, तो उसने अपने सामने घटना होने से इनकार कर दिया। मृतक की बहन ने भी घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं होने और भांजी से घटना की जानकारी मिलने की बात कही। अब जानिए, पुलिस ने कैसे पकड़ा कपड़ों, घटनास्थल के खून का DNA जांच में मिलान
अब पुलिस के सामने चुनौती थी, हत्या को साबित करना। ऐसे में घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों को जांच का आधार बनाया गया। पुलिस ने मृतक के खून से सने कपड़े, घटनास्थल की मिट्टी में मिले खून के नमूने और आरोपी पति के कपड़ों पर मिले धब्बों को जांच के लिए एफएसएल भेजा था। इन नमूनों की DNA जांच कराई गई। अभियोजन के अनुसार जांच में नमूनों का मिलान हुआ, जो महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। इसके अलावा, घटना के बाद आरोपी के फरार हो जाने की परिस्थिति को भी अभियोजन ने अदालत के सामने रखा। कोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और घटनास्थल से जुड़े परिस्थितिजन्य तथ्यों का परीक्षण किया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सुखराम को उम्रकैद सजा सुनाई। विवेचना उप निरीक्षक दिलीप यादव ने की थी। इस खबर से संबंधित सवाल-जवाब गवाहों के मुकरने से केस पर क्या असर पड़ता है?
जब कोई गवाह अदालत में पहले दिए बयान से पलट जाता है, तो उसे ‘होस्टाइल विटनेस’ (Hostile Witness) कहते हैं। इससे अभियोजन पक्ष का केस कमजोर हो सकता है, क्योंकि गवाही असहम सबूत होती है। अक्सर गवाह डर, दबाव, लालच या धमकी के कारण बयान बदल देते हैं। क्या गवाह के मुकरने से केस खत्म हो जाता है?
नहीं, गवाह के मुकरने से केस खारिज नहीं होता। अदालत उसकी पूरी गवाही को नजरअंदाज नहीं करती। बयान के जिस हिस्से की पुष्टि DNA रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड या अन्य सबूतों से होती है, उसे अदालत साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकती है।
